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उद्यमियों ने खोला मोर्चा: ई-कॉमर्स कंपनियों के बिजनेस मॉडल की जांच होनी चाहिए- सीटीआई

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 28 Jun 2021 07:00 PM IST

सार

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने ऑनलाइन बिजनेस की जांच के लिए रेगुलेटरी ऑथॉरिटी का गठन करने की मांग केंद्र सरकार से की है। कहा है कि पिछले 3 साल से इस मुद्दे को उठाया जा रहा है।
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विस्तार

ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ व्यापारियों व उद्यमियों ने मोर्चा खोल दिया है। व्यापारिक संगठनों ने ई-कॉमर्स कंपनियों के बिजनेस मॉडल की जांच करने की मांग सरकार से की है। कहा है कि ई-कॉमर्स की आड़ में चोरी छिपे चीनी सामान बेचा जा रहा है। ऑनलाइन खरीब-बिक्री की वजह से देश के लाखों छोटे व्यापारियों का कारोबार तबाह हो गया है।
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चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने ऑनलाइन बिजनेस की जांच के लिए रेगुलेटरी ऑथॉरिटी का गठन करने की मांग केंद्र सरकार से की है। कहा है कि पिछले 3 साल से इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बयान देने के बजाय ई-कॉमर्स कंपनियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।


ई-कॉमर्स/ऑन लाइन शॉपिंग वेबसाइट चलाने वाली कंपनियों पर निगरानी रखने और उनके लिए सख्त नियम लागू करने की आवश्यकता है। सीटीआई ने इस संबंध में पीयूष गोयल को पत्र भी लिखा है। पत्र में कहा गया है कि देश के लाखों दुकानदारों का व्यापार चौपट करने वाली विभिन्न शॉपिंग वेबसाइट आखिर किस आधार पर इतना बड़ा डिस्काउंट ऑफर कर रही हैं। 

सीटीआई के महासचिव रमेश आहूजा ने कहा कि एक सर्वे में जब राय ली गई तो पता चला कि ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान नकली सामान ज्यादा मिल रहा है। कॉस्मेटिक, परफ्यूम, जूते, बैग ज्यादातर नकली मिल रहा है। ये कंपनियां हर दूसरे महीने पर महासेल का खेल खेलते हुए 60 से 70 प्रतिशत का डिस्काउंट देने का दावा करती हैं।

सवाल यह उठता है कि आखिर ये कंपनियां किस आधार पर इतना मोटा डिस्काउंट लोगों को उपलब्ध कराती हैं। ई कॉमर्स प्लेटफार्म पर भी वस्तुओं के निर्माण के मूल देश का उल्लेख करना अनिवार्य करना चाहिए। यूरोप और अमेरिका से कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन निर्मित माल खरीदती है।

एपेक्स चैंबर के विशेष सदस्य व दिल्ली लघु भारती के मुकेश अग्रवाल ने केंद्र व राज्य सरकार से कई सवाल पूछा है। पूछा है कि क्या देश को छोटो उद्योग की आवश्यकता नहीं है? क्या छोटा उद्योग चलाना अपराध हो गया है? छोटे उद्योग के लिए सभी सेवाएं अधिकतम क्यों है? अग्रवाल ने कहा कि कोविड काल में अगर छोटे उद्योग-धंधों को सहारा नहीं दिया गया तो देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर आने में काफी वक्त लग जाएगा।
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