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सांसों पर गहराने लगा संकट: ग्रैप लागू, फिर भी धूल के हवाले दिल्ली की सड़कें, उतारी जाएंगी चार नई एंटी-स्मोक गन
Sun, 25 Oct 2026 01:45 AM IST
दुष्यंत शर्मा
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 25 Oct 2026 01:45 AM IST
सार
सरकार 103 मैकेनिकल रोड स्वीपर, 608 एंटी स्मॉग गन और 200 ऊंची इमारतों पर एंटी स्मॉग गन लगाने के दावे कर रही है, लेकिन उत्तम नगर से नजफगढ़, मंडावली, चंदर विहार, लक्ष्मी नगर, आईटीओ और मंडी हाउस जैसे इलाकों में सड़कें और फुटपाथ धूल से अटे पड़े हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रैप-1 लागू है, लेकिन सड़कों पर धूल, महीनों से पड़ा निर्माण मलबा और खुले में पड़ी निर्माण सामग्री बता रही है कि नियमों का पालन नहीं हो रहा है। सरकार 103 मैकेनिकल रोड स्वीपर, 608 एंटी स्मॉग गन और 200 ऊंची इमारतों पर एंटी स्मॉग गन लगाने के दावे कर रही है, लेकिन उत्तम नगर से नजफगढ़, मंडावली, चंदर विहार, लक्ष्मी नगर, आईटीओ और मंडी हाउस जैसे इलाकों में सड़कें और फुटपाथ धूल से अटे पड़े हैं।
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मंडावली और चंदर विहार की कई गलियों में डीएसआईआईडीसी के काम के बीच मलबा पड़ा है। विकास मार्ग पर कड़कड़ी मोड़ से लक्ष्मी नगर तक जल बोर्ड के काम के कारण सड़क पर गड्ढे और बैरिकेडिंग की स्थिति बनी हुई है। बसों और दूसरे वाहनों से धूल उड़ने से राहगीरों को परेशानी हो रही। निर्माण विहार से लक्ष्मी नगर के बीच सड़क किनारे मलबा, टूटे फुटपाथ सवाल खड़े करते हैं। आनंद विहार प्रदूषण हॉटस्पॉट है, लेकिन आसपास धूल से भरे ये हिस्से सरकार की नजर में नहीं है।
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निर्माण स्थलों की अनदेखी
आईटीओ, मंडी हाउस, पंडित पंत मार्ग तक सड़क, फुटपाथ, सीवेज, पानी की पाइप लाइन से मिट्टी, बालू की भरमार है। संबंधित एजेंसियां कागजों में ओके हैं, लेकिन मौके पर न इनकी जांच हो रही, न कार्रवाई। सीएक्यूएम के ग्रैप-1 निर्देशों में मशीनी सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण मलबे का नियमित उठान और खुले में कचरा जलाने पर रोक है। सरकारी कार्यालयों, औद्योगिक क्षेत्रों में धड़ल्ले से डीजी सेट काला धुंआ छोड़ रहे। एनडीएमसी, एमसीडी के पुराने ट्रैक्टर सड़कों पर दौड़ रहे।
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मशीनों की संख्या बड़ी, नतीजा छोटा
दिल्ली सरकार के मुताबिक, 283 निर्माण स्थलों पर 608 एंटी स्मॉग गन लगाई गई हैं। 200 ऊंची इमारतों पर भी एंटी स्मॉग गन और सड़कों पर 103 मैकेनिकल रोड स्वीपर तैनाती का दावा है लेकिन इसका असर कम है। सीएक्यूएम ने मशीनी सफाई के लिए सड़क की चौड़ाई और उपलब्ध मार्ग के अनुसार मशीनें तैनात करने व उनकी उपयोगिता सुनिश्चित करने की नसीहत दी है। आईटीओ पर सड़क के बीच लगे वाटर स्प्रिंकलर से भारी राहत है।
एजेंसियां और नागरिकों दोनों की जिम्मेदारी
जल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी, डीएसआईआईडीसी, एमसीडी और एनडीएमसी जैसी एजेंसियां खुदाई के बाद सड़क की बहाली, मलबा हटाने और धूल नियंत्रण की जिम्मेदारी पुराने तरीके से ही निभा रहीं। निर्माण ठेकेदारों को सामग्री ढककर रखने के निर्देश हैं। लोगों को खुले में कचरा या पत्तियां जलाने पर निषेध है, वाहनों को वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के साथ ही चलाने की अनुमति है। छोटी दूरी के लिए सार्वजनिक परिवहन या कारपूलिंग की हिदायत दी गई है। लेकिन सरकारी एजेंसियां और कई लोग इसका उल्लंघन कर रहे हैं।
सड़कों पर उतरेंगी चार नई एंटी-स्मोक गन
लोक निर्माण विभाग के ईस्ट रोड डिवीजन ने पूर्वी दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए कदम उठाया है। इसके तहत चार अतिरिक्त आधुनिक वाटर स्प्रिंकलर एंटी-स्मोक गन तैनात की जाएंगी। यह गन किराये पर ली जाएंगी और चारों उप-मंडलों के विभिन्न सड़क मार्गों पर चलेंगी। इनका उद्देश्य सड़कों की धूल और हवा में घुल रहे प्रदूषण के सूक्ष्म कणों को नियंत्रित करना है।
ये एंटी-स्मोक गन सामान्य डीजल वाहनों के बजाय संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) ट्रकों पर लगाई जाएंगी। इससे प्रदूषण कम करने वाले वाहन स्वयं प्रदूषण नहीं फैलाएंगे। इन गाड़ियों में कम से कम सात हजार लीटर क्षमता वाले पानी के टैंकर होंगे। योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए गाड़ियों में वैश्विक स्थिति निर्धारण प्रणाली (जीपीएस) और वेब-आधारित डैशबोर्ड लगाए जा रहे हैं। इससे इनकी लाइव ट्रैकिंग और डिजिटल निगरानी की जा सकेगी।