विजय माल्या की गिरफ्तारी के लिए दो गैर जमानती वारंट
अदालत ने कहा कि माल्या ने आपात यात्रा दस्तावेज नहीं लिया, क्योंकि वह वापस लौटना नहीं चाहता। ऐसे हालात में आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है। कोर्ट ने बचाव पक्ष के उस आग्रह को भी खारिज कर दिया कि गैर जमानती वारंट की जगह जमानती वारंट जारी किया जाए।
पटियाला हाउस स्थित मुख्य महानगर दंडाधिकारी सुमित दास ने ईडी की अर्जी पर सुनवाई के बाद मामले की सुनवाई 22 दिसंबर 2016 तय की है। विदेशी मुद्रा नियमन अधिनियम (फेरा) के मामले में आरोपी विजय माल्या को कोर्ट ने 9 जुलाई 2016 को वारंट जारी कर 9 सितंबर 2016 को पेश होने का निर्देश दिया था।
भारत लौटना चाहता है लेकिन सरकार ने उसका पासपोर्ट निलंबित कर दिया
माल्या ने कहा था कि वह भारत लौटना चाहता है लेकिन सरकार ने उसका पासपोर्ट निलंबित कर दिया है। इसलिए वह भारत आने में असमर्थ है। मामले में बहस करते हुए ईडी के अधिवक्ता नवीन कुमार माटा ने चार अक्तूबर को कहा था कि माल्या जानबूझ कर भारत वापस नहीं आना चाहता और देश छोड़ कर मात्र इस कारण गया है ताकि जांच प्रक्रिया से बचा जा सके।
यदि माल्या भारत वापस आना चाहता है तो वह लंदन स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क कर आपात यात्रा दस्तावेज जारी करवा सकते हैं। माल्या पर आरोप है कि उसने तय नियमों का उल्लंघन कर कथित तौर पर फार्मूला वन विश्व चैंपियनशिप में किंगफिशर का लोगो प्रदर्शित करने के लिए एक ब्रिटिश फर्म को लाखों रुपये का भुगतान किया।
अदालत ने चेक बाउंस मामले में दूसरी बार गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। पटियाला हाउस अदालत के महानगर दंडाधिकारी सुमित आनंद ने अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने चार फरवरी 2016 की तारीख तय की है। अदालत ने इससे पहले छह अगस्त 2016 को भी गैर जमानती वारंट जारी किया था।