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साढ़े पांच करोड़ की ठगी के प्रयास में तीन दबोचे
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 23 Sep 2014 12:52 AM IST
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का रिटायर डिप्टी मैनेजर अपने दो साथियों के साथ करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये की ठगी करना चाहता था। मगर बैंक की सतर्कता के चलते वह कामयाब नहीं हो पाया। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने पूर्व डिप्टी मैनेजर समेत तीन आरोपियों को दबोच लिया है। पुलिस गिरोह के सरगना की तलाश में जुट गई है।
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अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अशोक चांद के अनुसार पानीपत, हरियाणा के एक मीडिया हाउस ग्रुप की बैंक से पैसे निकलाने की लिमिट 13 करोड़ रुपये है। ग्रुप के खाते से पैसे निकलाने के लिए तीन चेक जमा कराए गए थे। साढे़ तीन करोड़ रुपये का चेक राजौरी गार्डन की पीएनबी शाखा में डाला गया।
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52 लाख रुपये का चेक पहाड़गंज की एक्सिस बैंक में और डेढ़ करोड़ का चेक द्वारका स्थित पीएनबी ब्रांच में डाला गया। बैंक प्रबंधन ने जब चेक जारी करने को लेकर बैंक खाता होल्डर व मीडिया ग्रुप के मालिक अनिल गाबा से पूछा तो उन्होंने इतनी बड़ी रकम के तीन चेक जारी करने से इनकार किया और चेक को कैश करने से मना कर दिया। गाबा की शिकायत पर द्वारका थाना पुलिस जालसाजी का मामला दर्जकर तफ्तीश कर रही थी।
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अपराध शाखा में तैनात इंस्पेक्टर अरविंद यादव की देखरेख में एसआई गुरमीत की टीम ने द्वारका इलाके से तीन आरोपियों को पकड़ लिया। आरोपियों की पहचान विकास पुरी निवासी विपुल ओबरॉय (26), रोहिणी निवासी कौशल कुमार (61) और लोनी गाजियाबाद निवासी पंचम कुमार (30) के रूप में हुई है। कौलश कुमार एसबीआई बैंक से डिप्टी मैनेजर के पद से रिटायर हो चुके है।
जांच के दौरान चेक स्कैन किए जाने की और उस पर खाता धारक के फर्जी हस्ताक्षर किए जाने की बात सामने आई। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि द्वारका निवासी गगन इस गिरोह का सरगना है। गगन ने ही असली चेक की स्कैन कॉपी हासिल की थी। उसी ने खाता धारक के फर्जी हस्ताक्षर किए थे।
गगन ने ये चैक बैंक में जमा कराने के लिए विपुल को दिए थे। पंचम कुमार के खाते में ये चेक जमा कराए गए थे। कौशल कुमार इन लोगों को रास्ता बता रहा था। विपुल के कोई 35 लाख रुपये लेकर भाग गया था, इस कारण उसे पैसे की जरूरत थी। वह एक दोस्त के जरिये गगन के संपर्क में आया था।