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सुरेंद्र कोली को फांसी या उम्रकैद फैसला आज
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 28 Jan 2015 01:52 PM IST
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निठारी कांड के अभियुक्त सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने पर पक्षकारों की बहस मंगलवार को पूरी हो गई है। इस पर अदालत बुधवार 28 जनवरी को अपना निर्णय सुनाएगी।
मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ के समक्ष पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेसी, सुरेंद्र कोली, केंद्र और राज्य सरकार के वकीलों ने अपना पक्ष रखा।
पीयूडीआर के वकील की दलील थी कि राज्यपाल और राष्ट्रपति की ओर से सुरेंद्र कोली की दया याचिका के निस्तारण में अप्रत्याशित विलंब किया है। इस दौरान उसे कठोर कारावास से गुजरना पड़ रहा है।
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वकीलों ने सुप्रीमकोर्ट द्वारा शत्रुघन सिंह केस में सुनाए गए निर्णय पर विश्वास जताते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट ने दया याचिका के निस्तारण में देरी के आधार पर कई अभियुक्तों की फांसी को उम्रकैद में तब्दील किया है।
सुरेंद्र कोली का मामला भी ठीक वैसा ही है, इसलिए उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील किया जाए।
महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से दया याचिका के निस्तारण में अप्रत्याशित विलंब नहीं हुआ है। कोली की फाइल निरंतर प्रचलन में रही। चूंकि सुरेंद्र कोली लगातार इस मामले में याचिकाएं दाखिल करता रहा इस वजह से विलंब हुआ है।
उन्होंने कोली को कठोर यातना वाली बैरक में रखे जाने से भी इनकार किया। प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि कोली को आम कैदियों से मिलने जुलने की छूट है और वह कमरे से बाहर घूम भी सकता है।
उसके मानवाधिकार का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से अपर सॉलीसिटर जनरल अशोक मेहता अपना पक्ष पहले रख चुके हैं।
उधर डासना जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद सुरेंद्र कोली को मंगलवार सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच गाजियाबाद में सीबीआई विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार गुप्ता की कोर्ट में पेश किया गया। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा के अस्वस्थ होने के चलते मामले में सुनवाई नहीं हो सकी।
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मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ के समक्ष पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेसी, सुरेंद्र कोली, केंद्र और राज्य सरकार के वकीलों ने अपना पक्ष रखा।
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पीयूडीआर के वकील की दलील थी कि राज्यपाल और राष्ट्रपति की ओर से सुरेंद्र कोली की दया याचिका के निस्तारण में अप्रत्याशित विलंब किया है। इस दौरान उसे कठोर कारावास से गुजरना पड़ रहा है।
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वकीलों ने सुप्रीमकोर्ट द्वारा शत्रुघन सिंह केस में सुनाए गए निर्णय पर विश्वास जताते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट ने दया याचिका के निस्तारण में देरी के आधार पर कई अभियुक्तों की फांसी को उम्रकैद में तब्दील किया है।
सुरेंद्र कोली का मामला भी ठीक वैसा ही है, इसलिए उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील किया जाए।
महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से दया याचिका के निस्तारण में अप्रत्याशित विलंब नहीं हुआ है। कोली की फाइल निरंतर प्रचलन में रही। चूंकि सुरेंद्र कोली लगातार इस मामले में याचिकाएं दाखिल करता रहा इस वजह से विलंब हुआ है।
उन्होंने कोली को कठोर यातना वाली बैरक में रखे जाने से भी इनकार किया। प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि कोली को आम कैदियों से मिलने जुलने की छूट है और वह कमरे से बाहर घूम भी सकता है।
उसके मानवाधिकार का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से अपर सॉलीसिटर जनरल अशोक मेहता अपना पक्ष पहले रख चुके हैं।
उधर डासना जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद सुरेंद्र कोली को मंगलवार सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच गाजियाबाद में सीबीआई विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार गुप्ता की कोर्ट में पेश किया गया। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा के अस्वस्थ होने के चलते मामले में सुनवाई नहीं हो सकी।