इराक में लापता 39 भारतीयों का नहीं मिला सुराग, वीके सिंह ने फेसबुक पर साझा किया अनुभव
, इराक से लौट वीके सिंह
फेसबुक पर साझा किया अनुभव, कहा- मोसुल में अब भी डर का माहौल
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इराक के मोसुल शहर से आईएसआईएस का सफाया होने के बाद लापता 39 भारतीयों का अब तक कोई सुराग नहीं लग सका है। करीब एक सप्ताह तक इराक के विभिन्न शहरों की खाक छानने के बाद केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री एवं गाजियाबाद के सांसद वीके सिंह वापस भारत लौट आए हैं।
हालांकि लापता भारतीयों की तलाश में विदेश राज्यमंत्री एक बार फिर इराक जा सकते हैं। दो दिन पहले ही इराक से भारत लौटे वीके सिंह ने इराक में अपने अनुभवों को फेसबुक के माध्यम से साझा किया है। उन्होंने लिखा है कि वह 39 भारतीयों की तलाश में पुन: इराक आए थे।
वहां की सरकार की मदद से लापता लोगों की तलाश शुरू की गई। इराक के उच्चाधिकारियों और विभिन्न संगठनों से विचार-विमर्श कर वह मोसुल शहर भी गए। आईएसआईएस द्वारा इस शहर पर कब्जा किए जाने से पहले भारतीय लोग मोसुल शहर में ही काम करते थे। हाल ही में इराक सरकार ने मोसुल को आईएसआईएस से कब्जा मुक्त कराया है।
वीके सिंह ने फेसबुक पर लिखा
वीके सिंह ने फेसबुक पर लिखा है कि मोसुल शहर में युद्ध के कारण बहुत नुकसान हुआ है। लापता भारतीयों की खोज उस कंपनी से शुरू की गई, जहां भारतीय काम करते थे। क्षतिग्रस्त शहर मोसुल जहां अब भी डर का माहौल है।
उन्होंने वहां हर उस जगह पर लापता भारतीयों की तलाश कराई जहां-जहां उनके होने की जरा सी भी खबर थी, मगर कुछ पता नहीं चल सका। इसके बाद वह इराक के शहर तल अफार और बदूश नामक गांव भी गए। यहां हाल ही में लड़ाई समाप्त हुई है। अभी भी यहां पूर्व में लगाए गए बमों का डर है। सब जगह सैनिक टुकड़ियां और भारी सिक्योरिटी है।
स्थानीय नागरिकों में भी डर का माहौल है। वीके सिंह ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा है कि मोसुल में रात रुकने के लिए कोई जगह नहीं थी। ऐसे में वहां के गवर्नर केपीऐ के कमरे में हम तीन लोग एक साथ सोए थे। यह अनुभव काफी अच्छा रहा। इससे एक बार फिर सेना के पुराने दिनों की याद ताजा हो गई।