मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एमडीआई) का असिस्टेंट लाईब्रेरियन भरत डबास तैनात तो ज्ञान के खजाने में था। लेकिन घर के कलह ने उसे इतना तोड़ और डरा दिया कि अचानक अपने कलेजे के टुकड़ों को क्रूरता से मारकर खुद को भी मौत के गले लगा लिया। उसे दूसरा कोई रास्ता सूझा ही नहीं।
भरत को डर था कि पत्नी उसे फंसा देगी
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खौफ में बना हत्यारा
- फोटो : अमर उजाला
मामला उसके माता-पिता को साथ रखने को लेकर शुरू हुआ और अंत इतना भयानक हुआ कि सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। आरोप है कि उसकी पत्नी अपने साथ सास-ससुर को साथ नहीं रखने देना चाहती थी। अपने बच्चों को उनसे मिलने भी नहीं देना चाहती है। इसी बीच पिता की मौत के बाद मामला और गंभीर तब हो गया जब उसकी पत्नी ने बूढ़ी मां को भी साथ रखने से इनकार कर दिया।
शीतल के मां-बाप व बहन ने उसका मानसिक उत्पीडन किया
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भरत उसका बेटा अभिनव और अर्जुन
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भरत को डर था कि उसकी पत्नी महिलाओं के हितों के लिए बने कानूनों का गलत इस्तेमाल कर फंसा देगी। इस डर से उसने आत्महत्या से पहले अपने निदेशक व जिला उपायुक्त को पत्र लिखकर पत्नी व सास, ससुर द्वारा उत्पीडन किए जाने की जानकारी दे दी थी। भरत के पिता धर्म सिंह डबास हिसार विश्वविद्यालय से प्रोफेसर के पद से रिटायर हुए थे। वह सेक्टर-23 में अपनी पत्नी के साथ रहते थे।
रोहतक स्थित पैतृक घर छोड़कर गुडग़ांव मे किराये पर रहने का कारण यह था कि वह बीच-बीच में अपने पोते व बेटे, बहू से मिल लिया करेंगे। पर भरत की पत्नी शीतल ऐसा नहीं होने देती थी। एसीपी हवा सिंह के मुताबिक वह खुद तो उनके पास जाती नहीं थी और बेटों व पति के जाने पर भी रोक लगा रखी थी।
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बाप ने की बच्चों की हत्या फिर कर लिया सुसाइड
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चार माह पहले भरत के पिता की मौत हो गई। जिसके बाद मां को साथ रखने की बात आई। आरोप है कि शीतल ने साफ मना कर दिया। इस बात से वह परेशान रहता था। उसकी विधवा मां चार माह से बेटी के साथ सेक्टर-56 में रह रही थी।