कस्टम क्लियर होकर हवाई जहाज से लंदन जाने वाला ही था 30 करोड़ का ड्रग्स. तभी...
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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 30 करोड़ रुपये की ड्रग्स के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी आशीष (29), आसिम अली (23), राजेंद्र (26) और बसेलवा कॉलोनी, पुराना फरीदाबाद, निवासी प्रवीन सैनी (32) के रूप में हुई है।
प्रवीन आईजीआई एयरपोर्ट कस्टम में तैनात कर्मचारियों की मदद से अपनी कोरियर कंपनी के जरिये यूके, यूएई और अन्य खड़ी देशों में मादक पदार्थ भेजता था। आरोपियों के पास से 6.50 लाख नशे की टेबलेट और करीब 3 किलो मादक पदार्थ बरामद किया है।
बरामद ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 30 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। पुलिस की मानें तो नशे के धंधे में प्रवीन भारत का मुखिया है। वह लंदन में बैठे बलजीत सिंह उर्फ बल्ली और गजेंद्र सिंह राठोर उर्फ गज्जू के इशारे पर भारत से ड्रग्स विदेश भेजता था।
माल सीधे क्लीयर होकर हवाई जहाज से लंदन जाने वाला था
सेल के पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव ने बताया कि टीम को सूचना मिली थी कि लंदन में बैठे बलजीत और गजेंद्र साथी प्रवीन के जरिये नशीले पदार्थ भारत से विदेश भिजवा रहे हैं। प्रवीन आईजीआई स्थित कस्टम कर्मचारियों की मदद से नशीले पदार्थ विदेश जाने वाले सामान में छुपाकर भिजवाता है।
इस पर 18 मई को पुलिस टीम आईजीआई कस्टम की पार्किंग में पहुंची। वहां एक मिनी टेंपो में आशीष और आसिम नामक कस्टम क्लीयरेंस के 4 कार्टन की औपचारिकताएं पूरी कर रहे थे। इनके कागजात तैयार थे। यहां माल सीधे क्लीयर होकर हवाई जहाज से लंदन जाने वाला है।
पुलिस ने चारों पेटी खोली तो उसमें 3.50 लाख टेबलेट और करीब दो किलो ड्रग्स बरामद हुए। इनसे पूछताछ के बाद रविवार को प्रवीन और राजेंद्र को भी दबोच लिया गया। इनके पास से 3 लाख टेबलेट और एक किलोग्राम ड्रग्स बरामद हुए।
इनकी दिल्ली एयरपोर्ट पर कस्टम और एक्सरे में पहचान थी
प्रवीन ने बताया कि फरीदाबाद निवासी दोस्त कपिल धवन ने 4-5 साल पहले उसके नाम से एक एयर कोरियर एजेंसी का लाइसेंस लिया। इसकी आड़ में कपिल कैलाश राजपूत और राजन राजपूत को ड्रग्स भेजा था। वर्ष 2016 में इसकी मुलाकात लंदन निवासी जैश से हुई।
उसी ने बलजीत से मिलवाया, बाद में गजेंद्र से मिला। इनकी दिल्ली एयरपोर्ट पर कस्टम और एक्सरे में पहचान थी। बलजीत के जरिये उसकी मुलाकात अक्षित गुलिया नामक कस्टम हाउस एजेंट से हुई। बलजीत और गजेंद्र ने भारत में प्रवीन को अपने लोगों से मिलवा दिया।