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दिल्ली: जान प्यारी है तो इन इलाकों में बिल्कुल न जाएं

Fri, 08 Aug 2014 02:39 PM IST
Updated Fri, 08 Aug 2014 02:39 PM IST
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crime graph increasing in madangiri delhi and uttam nagar

देश की राजधानी में सरेराह चाकुओं से गोद-गोद कर एक युवक की हत्या को पूरे देश ने अपनी आंखों के सामने होते हुए देखा। दरअसल यह पूरा मामला सीसीटीवी में कैद हो चुका था जिसने देश भर में सनसनी पैदा कर दी।

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यह घटना जिस इलाके में हुई उसे मदनगिर के नाम से जानते हैं। फिलहाल यह क्षेत्र अपराधियों का गढ़ बन चुका है।

जेबकतरों से लेकर उठाईगिरों, बैंक डकैतों और जबरन वसूली करने वालों में से अधिकांश या तो इसी इलाके में रहते हैं या यह इलाका ही उनका वर्कस्टेशन होता है। यहां तक कि इसी साल जनवरी में हुए सनसनीखेज लाजपत नगर लूट के मुख्य आरोपी भी इसी इलाके में रहते थे।
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यहां दी जाती है क्राइम की ट्रेनिंग

crime graph increasing in madangiri delhi and uttam nagar

पुलिस सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में हुई पिछली छह बड़ी वारदातों को अंजाम देने वालों का ठिकाना यही इलाका था। चौंकाने वाली बात ये है कि इस इलाके में अपराधियों का संगठित गिरोह है जो अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए बच्चों या किशोरों का इस्तेमाल करते हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, टीनएजर्स को गैंग में शामिल करने से पहले उन्हें बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है। इनमें से कई पेरोल पर भी हैं। पुलिस के मुताबिक गैंग का कोई भी सदस्य अगर जेल जाता है तो उसके बेल से लेकर घर तक का सारा खर्चा गैंग ही वहन करता है।

टीनएजर्स या किशोरों को इस्तेमाल करने का बड़ा कारण है कि उन्हें सजा कम मिलती है। इसके अलावा उनका कोई पुलिस रिकॉर्ड न होने की वजह से पुलिस के लिए उन्हें पहचानना ‌भी मुश्किल होता है। ऐसे में किशोरों के लिए पैसा कमाने का यह सबसे आसान रास्ता बन जाता है।

क्राइम के तरीकों में हुए बदलाव

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एक पुलिस इंस्पेक्टर के मुताबिक पिछले कुछ सालों में क्राइम के तरीकों में बहुत बदलाव आया है। इस बदलाव के चलते ही मदनगिर का इलाका नए अपराधियों के गढ़ के तौर पर सामने आया है।

इस इलाके में अपराध पर नियंत्रण के लिए पुलिस विशेष ऑफिस भी बनाया है। संगम विहार और दक्षिण्‍ा पुरी इलाका डीटीसी बसों में जेबकतरों का गढ़ बन चुका था।

ऑटोमेटिक डोर वाली डीटीसी बसों के आने से जेबकतरों के काम पर नकेल लगी जिसके बाद से इन्होंने चोरी और छिनैती जैसे अपराधों से अपना खर्चा चलाना शुरू किया। जबकि बड़ अपराधियों ने प्रॉपर्टी डीलिंग और विवादित संपत्तियों को खाली कराने का काम शुरू कर दिया।

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इनके आतंक से सब त्रस्त

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इतना ही नहीं यहां के अपराधियों ने मेरठ के हथियार तस्करों के साथ मिलकर काम करना भी शुरू कर दिया है। पुलिस के मुताबिक यहां के गैंग फोन पर असलहों की डिलीवरी का काम भी करते हैं। ‌दिल्ली के किसी भी इलाके में हथियार पहुंचाने में इन्हें महारत हासिल है।

जिस इलाके में इन ‌अपराधियों का वर्चस्व है वहां एक भी ढंग का स्कूल नहीं है और न ही किसी तरह की सोशल अवेयरनेस है।

इलाके के दुकानदार भी इन अपराधियों से त्रस्त हैं। इलाके में इन अपराधियों का इतना आतंक है कि रेहड़ी की दुकान लगाने वाले भी गुंडा टैक्स भरते हैं।

इस इलाके में होते हैं सबसे ज्यादा यौन अपराध

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राजधानी में कुछ थाना क्षेत्रों में महिलाओं के खिलाफ अपराध अधिक होते हैं। घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और अपहरण और गुमशुदगी की शिकायतों को आधार बनाकर दिल्ली सरकार की महिला हेल्पलाइन-183 ने थाना क्षेत्रों की रैंकिंग की है।

 
टॉप-10 थाना क्षेत्रों में घरेलू हिंसा की 289 से 499 और यौन उत्पीड़न  की 108 से 215 शिकायतें आई हैं। यौन उत्पीड़न के मामले में उत्तम नगर व सुल्तानपुरी थाना क्षेत्र पहले व दूसरे नंबर पर है।

रैकिंग में लड़कियों की गुमशुदगी, अपहरण और बंधक बनाने के मामले में जहांगीरपुर 551 मामलों के साथ टॉप पर है। वहीं घरेलू हिंसा की 499 शिकायतों के साथ डाबड़ी पहले नंबर पर है। यौन उत्पीड़न के मामले में उत्तम नगर 454 मामलों के साथ टॉप पर है। वहीं यौन उत्पीड़न व घरेलू हिंसा के मामलों में करीब 40-40 थाने ऐसे हैं, जहां से एक-एक शिकायत ही मिली है।

मदद के लिए महिला हेल्पलाइन की भी

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राजधानी में महिला अपराधों की बात करें तो यौन उत्पीड़न और घरेलू हिंसा की शिकायतों के हिसाब से तिलक नगर और डाबड़ी की हालत सबसे खराब है। घरेलू हिंसा की 9273 शिकायतों में से सबसे अधिक 499 डाबड़ी से, जबकि तिलक नगर से 425 शिकायतें मिली हैं।

इसी तरह यौन उत्पीड़न की 14518 शिकायतों में डाबड़ी से 202 और तिलक नगर से 215 शिकायतें मिली हैं। हालांकि गुमशुदगी, अपहरण और बंधक बनाने की शिकायत यहां से नहीं मिली।

महिला हेल्पलाइन 181 की संयोजक खदीजा फारुकी ने बताया कि हेल्पलाइन पर जो शिकायतें मिली हैं, उसके हिसाब से थाना क्षेत्रों की रैंकिंग की गई है। जहां से शिकायतें अधिक मिली हैं, वहां एनजीओ की मदद से उसका कारण पता किया जाएगा। जहां से शिकायतें कम आई हैं, उन क्षेत्रों का भी अध्ययन किया जाएगा। ऐसा भी हो सकता है मामले इससे अधिक हों, क्योंकि बहुत सी महिलाएं सीधे थाने जाती हैं।

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