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हाशिमपुरा दंगा मामला: रिपोर्ट पेश न करने पर यूपी पुलिस के प्रति जताई नाराजगी
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 25 Nov 2016 12:08 AM IST
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हाशिमपुरा नरसंहार मामले में पीड़ित पक्ष के दो लोगों ने मुआवजे के लिए हाईकोर्ट में आवेदन दायर कर तर्क रखा कि उन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिला। अदालत ने मेरठ विधिक सेवा आयोग को उन लोगों की सूची पेश करने का निर्देश दिया है जिन्हें मुआवजा प्रदान किया गया है। इतना ही नहीं अदालत ने रिपोर्ट पेश न करने पर उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रति नाराजगी जताई है।
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न्यायमूर्ति गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष दो पीड़ितों ने आवेदन दायर कर तर्क रखा कि उन्हें सरकार से मुआवजा दिलवाया जाए। अदालत ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि घटना को वर्षों हो गए और अभी तक मुआवजा प्रदान नहीं किया गया। अदालत ने आयोग को उन पीड़ितों की सूची पेश करने का निर्देश दिया है जिन्हें अब तक मुआवजा दिया गया है। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने यूपी पुलिस से हादसे के समय पीएसी के ड्यूटी रजिस्टर व अन्य दस्तावेज के बारे में जानकारी मांगी।
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यूपी पुलिस को यह बताने का निर्देश दिया है कि हादसे से संबंधी ड्यूटी रजिस्टर व अन्य सरकारी दस्तावेज उनके पास हैं भी या नहीं, अगर नहीं हैं तो क्यों नहीं हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई 8 दिसंबर तय की है।
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खंडपीठ इस मामले में आरोपी बनाए गए पीएसी के 16 जवानों को निचली अदालत द्वारा 21 मार्च 2015 को बरी करने के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही है। निचली अदालत के फैसले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) व उत्तर प्रदेश सरकार के साथ ही पीड़ित परिवारों ने चुनौती दी है।
क्या है मामला :
मेरठ जिला स्थित हाशिमपुरा में 22 मई 1987 को बड़ी संख्या में पीएसी के जवान पहुंचे थे। जवानों ने वहां से मस्जिद के सामने चल रही धार्मिक सभा में से एक समुदाय के करीब 50 लोगों को हिरासत में लिया। आरोप था कि फिर 42 लोगों को गोली मारकर हत्या करने के बाद उनके शव गंग नहर में फेंक दिए थे।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने वर्ष 1996 में गाजियाबाद के मुख्य न्यायिक न्यायाधीश की अदालत में आरोप पत्र दायर किया था। आरोप पत्र में 19 लोगों को हत्या, हत्या का प्रयास, साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और साजिश रखने की धाराओं में आरोपी बनाया गया था। वर्ष 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को दिल्ली अदालत में स्थानांतरित कर दिया था। वर्तमान में मामले में आरोपी बनाए गए 16 लोग जीवित हैं। तीन लोगों की मौत हो चुकी है।