विदेशी सिगरेट की दीवानगी के लिए यहां कॉर्पोरेट कर्मचारी तक कर रहे क्राइम
यहां धुएं में उड़ता है विदेशी सिगरेट का फ्लेवर
-कॉरपोरेट में काम करने वाले लोगों की पहली पसंद है विदेशी सिगरेट
-नियम को ताक पर रखकर बेची जा रहा है यहां सिगरेट
शाहनवाज आलम
गुरुग्राम।
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विस्तार
दरअसल, भारत में सिगरेट और तंबाकू उत्पाद बेचने के लिए कोटपा 2003 (सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम) नियम है। इसके तहत किसी भी तंबाकू उत्पाद को बेचने के लिए नियम कानून बनाए गए हैं। चेतावनी लिखी होनी जरूरी है। इसके साथ ही हरियाणा में निकोटिन को जहर के सामान दर्जा दिया गया है। नशे के रूप में बेचने पर पाबंदी है। इन सबके बावजूद साइबर सिटी के कॉरपोरेट कल्चर के बीच निकोटिन और विदेशी सिगरेट ने अपनी जगह बना ली है। कंपनियों के आस-पास बड़ी संख्या में छोटे दुकानों के जरिये बेची जा रही है।
वैसे तो सिगरेट के डिब्बों पर वैधानिक चेतावनी लिखी होती है कि सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारण है। लेकिन फिर भी आज के समय में सिगरेट पीना युवाओं में एक शौक की तरह है। लोग अपना स्टेटस मेंटेन रखने के लिए या उठाने के लिए महंगी ब्रांडेड सिगरेट पीते हैं। फर्म हाउस व हुक्का बार में होने वाली पार्टियों में भी इसका जमकर इस्तेमाल होता है। बता दें कि शुक्रवार को फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की संयुक्त कार्रवाई में दो छोटे दुकानों पर 400 से अधिक विदेशी सिगरेट मिली थी।
तस्करी से साइबर सिटी तक पहुंचता है विदेशी सिगरेट
साइबर सिटी में विदेशी सिगरेट कहां से आता है? इसका ठोस जवाब न तो पुलिस के पास है और न ही प्रशासन के बाद। सूत्रों की मानें तो अवैध तरीके से शहर में विदेशी सिगरेट बिक रहा है। लेकिन, इसकी भनक किसी को नहीं होती है।
जानकारों की मानें तो यूरो मॉनिटर इंटरनेशनल द्वारा अगस्त 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक विदेशों से तस्करी कर लाए जाने वाले तंबाकू भारतीय बाजारों में बेहद सस्ते दामों में बेचे जा रहे हैं। म्यांमार, खाड़ी देश, इंडोनेशिया, साउथ कोरिया और यूरोप से बड़ी मात्रा में अवैध सिगरेट भारतीय बाजारों में बिक रही है। ये सिगरेट भारत में मैंगलोर, चेन्नई, मुंबई, विशाखापट्टनम, गोवा, कोलकाता के बंदरगाहों से आती है। यहां से इनको देश के दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा है।
क्यों पसंद किए जाते हैं विदेशी सिगरेट
युवाओं के बीच विदेशी सिगरेट उसके फ्लेवर और टशन के कारण प्रसिद्ध है। यह धीरे-धीरे जलता़ है। अलग-अलग फ्लेवर में मौजूद है। विदेशी सिगरेट में गुडंग गरम, एसेस लाइ्टस, स्लिम्स मूड्स, जरूम ब्लैक, डनहिल स्विच और मॉन्ड ब्रांड की अधिक मांग है।
क्यों है देश में विदेशी सिगरेट पर रोक
शहर में तंबाकू नियंत्रण के लिए अभियान चलाने वाले संबध हेल्थ फाउंडेशन के ट्रस्टी संजय सेठ बताते हैं कि कोटपा 2003 (सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम) की धारा 7 के तहत सिगरेट के पैकेजिंग नियम निर्धारित किए गए हैं।
इसमें सिगरेट के दोनों तरफ 85 फीसदी क्षेत्र में फोटोजनित चेतावनी होना जरूरी है। विदेशी सिगरेट में यह नहीं होने से भारतीय कानून का उल्लंघन है।
विनय प्रताप, उपायुक्त: विदेशी सिगरेट की डिब्बी पर %धूम्रपान सेहत के लिए हानिकारक है’ संबंधी वैधानिक चेतावनी नहीं लिखी होती। यह काननून गलत है। इसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हुक्काबार पर भी शिकंजा कसने की हिदायत दी गई हैं। ऐसे सिगरेट बेचने वालों के खिलाफ नियमानुसार खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।