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विकास आत्मदाह प्रकरण : 3 सूदखोरों पर एफआईआर

Wed, 06 May 2015 01:26 AM IST
अमर उजाला, मुरादनगर
अमर उजाला, मुरादनगर Updated Wed, 06 May 2015 01:26 AM IST
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3 FIR on usury.

500 रुपये रोज का कर्ज विकास की जिंदगी पर भारी पड़ गया। सूदखोरों ने 50 हजार रुपये देकर विकास पर 80 हजार बना दिए और कर्ज लौटाने के लिए धमकाने लगे।

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यह खुलासा हादसे के 24 घंटे बाद मृतक की पत्नी विमलेश ने किया है। विमलेश की ओर से तीन सूदखोरों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई  है। नामजदों में दो सरना गांव एवं तीसरा दुहाई का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक नामजद फरार हैं।
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सरना निवासी विकास (26) पुत्र जगवीर ठेली पटरी लगाकर बच्चों का पालन पोषण करता था। पत्नी विमलेश के मुताबिक तीन माह पहले विकास ने गांव निवासी मुन्ना एवं पप्पू के कहने पर दुहाई गांव में रहने वाले जगदीश से 50 हजार रुपये कलेक्शन पर लिए थे, जिसके तहत जगदीश ने 100 दिन का ब्याज काटकर विकास को 40 हजार रुपये दिए।
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विकास को 100 दिन तक लगातार 500 रुपये सूदखोर को देने थे। पत्नी का कहना है कि विकास ने लगातार सूदखोर को रुपये दिए थे। मगर पिछले दिनों सूदखोर ने विकास पर 80 हजार का कर्ज निकाल दिया।

विकास इस बात को लेकर परेशान रहता था। उधर, सूदखोर ने गांव निवासी मुन्ना एवं पप्पू के साथ मिलकर विकास पर कर्ज लौटाने के लिए दबाव बना दिया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी कारण से विकास ने केरोसिन छिड़ककर आत्मदाह किया है।

पुलिस ने तीनों केविरुद्ध नामजद रिपोर्ट दर्ज की है। गिरफ्तारी केलिए तीनों के ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। गौरतलब है कि सूदखोरों से परेशान होकर सरना गांव निवासी विकास ने रविवार को केरोसिन छिड़ककर खुद को आग लगा ली थी और सोमवार सुबह उसकी दिल्ली के गुरुतेगबहादुर अस्पताल में मौत हो गई थी।

आग लगाकर 20 मीटर दौड़ा विकास
गांव निवासी चश्मदीद धर्मपाल ने बताया कि विकास आग लगने के बाद शोर मचाते हुए घर से बाहर की ओर दौड़ा तो आग की लपेटों में उसे घिरा देख कालोनी केलोग एकत्र हो गए।


करीब 20 मीटर तक विकास दौड़ता रहा। बाद में लोगों ने रेत और पानी फेंककर आग बुझाई। विकास ने कमरा बंद कर आग लगाई थी और कमरे में गैस सिलेंडर था।

इसके बाद वह जिस प्लाट के पास जलता हुआ पहुंचा वहा 75 झुग्गियां हैं। यदि आग की लपटें सिलेंडर या झुग्गी तक पहुंच जाती है कि भयंकर हादसा भी हो सकता था।

गाजियाबाद में फैला सूदखोरों का मकड़जाल

सूदखोरों के मकड़जाल में फंसकर आत्मदाह करने वाला विकास पहला व्यक्ति नहीं है। इससे पहले भी कई मामले मेें सामने आ चुके हैं। जहां सूदखोरों के चुंगल में फंसने केबाद पीड़ित या तो जान दे देता है या शहर छोड़कर भाग जाते हैं।

कई बार तो सूदखोर पीड़ित से उसकी मां बहन पत्नी बेटी तक की डिमांड कर बैठते हैं और कर्ज में डूबा व्यक्ति सब कुछ करने केलिए तैयार हो जाता है। पुलिस प्रशासन जानकर भी ऐसे मामलों में अंजान बना रहता है।

कैसे कलेक्शन में फंसता है शिकार
कलेक्शन 100 दिन के लिए दी जाती है। उदाहरण केतौर पर किसी ने 10 हजार रुपये की कलेक्शन ली तो उसे सूदखोर 100 दिन का ब्याज 1500 रुपये काट 8500 रुपये देगा।

8500 रुपये 100 रुपये रोज के हिसाब से 100 दिन में पूरा करेगा। ऐसे में कलेक्शन टूट जाती है तो कर्जदार को पेनाल्टी के साथ कर्ज लौटाना होगा।

मासूमों के सिर से उठा पिता का साया

विकास तीन भाइयों में सबसे छोटा था। विकास के परिवार में पत्नी विमलेश और दो बच्चे विक्रांत एवं तरुण हैं।

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