फिल्मी ‘वासेपुर’ बनने की राह पर है ये जिला
जिले में मुआवजे से आई संपन्नता व युवाओं पर
गौतमबुद्ध
नगर में लोगों को जमीन के एवज में मोटी रकम मिली है। परिवार में शिक्षा का
कम होना और रुपये की भरमार होने के कारण उन्हें दिशाहीन होते देर नहीं
लगती है। वहीं, कुछ कुख्यात अपराधी युवाओं के हीरो बन गए हैं।
पुलिस ने एक
दशक में 50 से अधिक ऐसे युवाओं को गिरफ्तार किया है, जो उच्च शिक्षित हैं।
साल 2004 में बीडीएस कर रहे चार छात्रों ने एक कार के टायर चोरी किए थे।
साल 2005 में एमबीए के दो छात्रों को कासना पुलिस ने चेन स्नैचिंग के आरोप
में गिरफ्तार किया था। साल 2007 में सूरजपुर पुलिस ने इंटर के तीन छात्रों
को बाइक लूट के आरोप में गिरफ्तार किया था। साल 2014 में वर्चस्व को कायम
रखने के एक एमबीए के छात्र ने दूसरे पर गोली चलाई थी।
परिजन नहीं रख पा रहे बच्चों पर ध्यान
मनोचिकित्सक
डॉ. सुनील अवाना ने बताया कि युवाओं में जल्दी पैसा कमाने की ललक पनप रही
है, जिसके चलते वे अपराध का रास्ता अपना रहे हैं। इंटरनेट और फिल्मों में
अपराध से तेजी से मिलने वाली पावर युवाओं पर हावी हो रही है। न्यूक्लर
फैमिली में लोग बच्चों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। सामाजिक और नैतिक
मूल्यों का पतन भी इसका बड़ा कारण है।
कई गैंग हैं सक्रिय
एसपी
डॉ. बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि क्षेत्र में कई गैंग सक्रिय है और यह
स्थानीय हैं। शिक्षित युवा भी उनके नाम की चमक देखकर पथ से भटक जाते हैं।
परिजनों का उन पर कोई कमांड नहीं होता है।
दबंग साबित करने की होड़
डॉ.
आनंद आर्य कहते हैं युवाओं में दबंग साबित करने की होड़ सी मच रही है। इस
कारण वह अवैध असलहे पास में रखने लगे हैं। परिवार बच्चों की गतिविधि पर
ध्यान दें और उन्हें खर्च के लिए ज्यादा रुपये न दें। वहीं पूर्व मंत्री
नवाब सिंह नागर ने कहा कि बच्चों की गलत संगत उन्हें अपराध की ओर जाने के
लिए मजबूर करती है।