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CREA Report: दिल्ली में पीएम10 मानक से तीन गुना अधिक, वायु प्रदूषित शहरों में शीर्ष पर है देश की राजधानी

Sat, 10 Jan 2026 03:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 10 Jan 2026 03:51 AM IST
सार

देश के प्रदूषित शहरों पर ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (सीआरईए) की रिपोर्ट के अनुसार यूपी के 416 शहरों की हवा लगातार पांच साल से खराब है।

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CREA Report: PM10 in Delhi three times higher than the standard
Delhi Pollution - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के प्रदूषित शहरों पर ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (सीआरईए) की रिपोर्ट के अनुसार यूपी के 416 शहरों की हवा लगातार पांच साल से खराब है। केंद्रीय वायू प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से चिन्हित गैर-प्राप्ति शहर वर्षों से लगातार राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (एनएएक्यूएस) को पूरा करने में विफल रहे हैं। 

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जानकारी के अनुसार, हवा में पाए जाने वाले प्रमुख प्रदूषकों पीएम 10 के मामले में प्रदूषित शहरों में दिल्ली शीर्ष स्थान पर है। दिल्ली में पीएम 10 का स्तर 197 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पाया गया, जो राष्ट्रीय मानक से तीन गुना अधिक है। दिल्ली के बाद दूसरे और तीसरे स्थान पर गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा रहा, जहां औसत पीएम 10 का स्तर क्रमश: 190 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 188 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पाया गया। इसके साथ ही सर्वाधिक पीएम 10 स्तर वाले 50 शहरों में राजस्थान के 18, यूपी के 10, एमपी के 5 और बिहार व ओडिशा के चार-चार शहर शामिल हैं। 
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पीएम 10 से तात्पर्य 10 माइक्रोमीटर या उसके कम व्यास वाले कण पदार्थ से है जो सांस के साथ फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश कर जाते हैं और श्वसन और हृदय संबंधी गंभीर बीमारियां पैदा करते हैं।  रिपोर्ट के अनुसार, यूपी 416 गैर-प्राप्ति शहरों के साथ सूची में सबसे ऊपर है। उसके बाद राजस्थान (158), गुजरात (152), मध्य प्रदेश (143), पंजाब और बिहार (प्रत्येक 136) और पश्चिम बंगाल (124) का स्थान आता है। 
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गैर-प्राप्ति शहर उन शहरों को कहा जाता है, जो लगातार पांच वर्ष या उससे अधिक समय से एनएएक्यूएस को पूरा नहीं कर पाते। यानी, इन शहरों में हवा की गुणवत्ता तय मानकों से लगातार खराब रहती है। एनसीएपी के तहत इन शहरों में वायु प्रदूषण को कम करने के उपाय किए जाते हैं।

23 शहरों में पीएम 10 का स्तर बढ़ा 
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के 130 शहरों में से 28 शहरों में अभी भी वायु प्रदूषण पर निगरानी रखने वाले स्टेशन यानी निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएएक्यूएमएस) नहीं हैं। जिन 102 शहरों में यह स्टेशन हैं, उनमें से 100 शहरों में पीएम10 का स्तर 80 प्रतिशत या उससे अधिक पाया गया है। पीएम10 नियंत्रण में प्रगति मिली-जुली रही है। 23 शहरों ने संशोधित 40 प्रतिशत पीएम10 कमी का लक्ष्य हासिल कर लिया है, 28 शहरों में 21-40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, 26 शहरों में 1-20 प्रतिशत का मामूली सुधार हुआ है, जबकि 23 शहरों में कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से पीएम10 के स्तर में वास्तव में वृद्धि हुई है।

विज्ञान आधारित सुधार ही उपाय : सीआरईए विश्लेषक 
भारत में सीआरईए के विश्लेषक मनोज कुमार के अनुसार, लक्षित और विज्ञान-आधारित सुधारों के माध्यम से देश के वायु गुणवत्ता प्रशासन को मजबूत करना ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता हो सकता है। इसका मतलब है कि पीएम10 की तुलना में पीएम2.5 और इसके पूर्ववर्ती गैसों (सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड) को प्राथमिकता देना, एनसीएपी के तहत गैर-प्राप्ति शहरों की सूची को संशोधित करना, उद्योगों और बिजली संयंत्रों के लिए सख्त उत्सर्जन मानक निर्धारित करना, स्रोत विभाजन अध्ययनों के आधार पर धन आवंटित करना और क्षेत्रीय स्तर पर वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वायुक्षेत्र-आधारित दृष्टिकोण अपनाना होगा।


एनसीएपी के तहत 13,415 करोड़ जारी 
कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर अब तक एनसीएपी और 15वें वित्त आयोग के अनुदानों के तहत 13,415 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इनमें से 9,929 करोड़ रुपये (74 प्रतिशत) का उपयोग किया जा चुका है। सड़क धूल प्रबंधन पर 68 प्रतिशत खर्च किया गया है, इसके बाद परिवहन (14 प्रतिशत) और अपशिष्ट एवं जैव द्रव्यमान जलाने (12 प्रतिशत) पर खर्च किया गया है। वहीं, उद्योगों, घरेलू ईंधन उपयोग, जन जागरूकता अभियान (प्रत्येक 1% से कम) और क्षमता निर्माण एवं निगरानी (3%) के लिए सीमित आवंटन प्राप्त हुए हैं।

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