{"_id":"66670936e2b3835ccc07a5ff","slug":"court-sentenced-life-imprisonment-to-three-uncles-who-killed-nephew-for-property-in-greater-noida-2024-06-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"17 साल बाद मिला न्याय: संपत्ति के लिए चाचा ने की थी भतीजे की हत्या, आजीवन कारावास की मिली सजा, जुर्माना भी लगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
17 साल बाद मिला न्याय: संपत्ति के लिए चाचा ने की थी भतीजे की हत्या, आजीवन कारावास की मिली सजा, जुर्माना भी लगा
Mon, 10 Jun 2024 07:43 PM IST
श्याम जी.
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
Published by: श्याम जी.
Updated Mon, 10 Jun 2024 07:43 PM IST
सार
ग्रेटर नोएडा के खेरली गांव में 17 साल पहले एक युवक की हत्या कर दी गई थी। मामले में कोर्ट ने दोषी पाए जाने पर आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 20-20 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा भी सुनाई है।
विज्ञापन
कोर्ट (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
17 साल पहले दनकौर के गांव खेरली में की गई सगे भतीजे की हत्या के मामले में मृतक के तीन चाचाओं को अपर जिला जज एवं सत्र न्यायाधीश-6 राजेश कुमार मिश्रा की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 20-20 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा भी सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर 60 दिन का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
विज्ञापन
शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) अमित कुमार शर्मा ने बताया कि सन 2007 में दनकौर के गांव खेरली के निवासी वीरेश्वर प्रताप उर्फ पिंटू की घर में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई। पिंटू की उस समय उम्र करीब 21 वर्ष की थी। जब पिंटू दो वर्ष का था तब उसके पिता की मौत हो गई थी। पिंटू के नाम काफी संपत्ति थी। इसी के विवाद में उसके सगे चाचा हरी, हरवीर, ज्ञानी और वेद ने घर में ही उसकी गोली मारकर हत्या कर दी।
विज्ञापन
इस मामले की रिपोर्ट मृतक के मामा सालेक चंद्र ने दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले की सुनवाई के दौरान एक आरोपी वेद की मौत हो गई। मुकदमे में 12 लोगों की गवाही हुई। अदालत में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटना स्थल से मिले साक्ष्य, हत्या में प्रयुक्त किए गए हथियार और गवाहों से दोष सिद्ध हुआ। इसके बाद अदालत ने तीनों चाचाओं हरी, हरवीर और ज्ञानी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
विज्ञापन