हाईकोर्ट की टिप्पणी: यह दुर्भाग्यपूर्ण कि विशेष रूप से विकलांग बच्चों के मामले में सरकार नहीं उठा रही सही कदम
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड द्वारा दायर 2018 की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण कि विशेष रूप से विकलांग बच्चों के मामले में सरकार उचित कदम नहीं उठा रही है।
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यह दुर्भाग्यपूर्ण कि विशेष रूप से विकलांग बच्चों के मामले में सरकार उचित कदम नहीं उठा रही है। उच्च न्यायालय ने गुरुवार को नेत्रहीन छात्रों के लिए सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल और अन्य शिक्षण स्टाफ के रिक्त पदों को भरने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा वे बिना आवाज के बच्चे हैं उनको हर सुविधा मिलनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड द्वारा दायर 2018 की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में संबंधित अधिकारियों को किंग्सवे कैंप स्थित सरकारी ब्लाइंड बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल में नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश देने की मांग की है। याची ने कहा 28 अगस्त 2019 के आदेश के अनुसार अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
याची ने कहा कि जब तक नियमित नियुक्तियां नहीं हो जाती हैं तब तक प्रतिनियुक्ति के माध्यम से या अनुबंध के आधार पर दो सप्ताह की अवधि के भीतर नियुक्तियां की जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता संतोष कुमार रूंगटा ने तर्क दिया कि स्कूल बिना प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के बिना और यहां तक कि उचित छात्रावास सुविधा के बिना भी चल रहा था। उन्होंने पीठ को यह भी बताया कि वर्ष 2019 से स्थिति और खराब हो गई है और उत्तरदाताओं को शैक्षणिक सत्र 2022-23 के दौरान सभी नेत्रहीन छात्रों के लिए छात्रावास की सुविधा और अन्य सुविधाओं के साथ सभी कक्षाओं के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
पीठ ने कहा कि इस मामले में समय-समय पर विभिन्न न्यायिक आदेश पारित किए गए हैं, जिसमें दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि स्कूल में प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए और छात्रों को सुविधाएं प्रदान की जाएं और अन्य बुनियादी सुविधाएं जैसे ब्रेल बुक और सहायक उपकरण आदि, उत्तरदाताओं ने शिक्षण स्टाफ की नियुक्ति नहीं की। अदालत ने याची के अधिवक्ता रूंगटा के दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि वह लगातार दौड़ रहे है ताकि बच्चों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जा सकें। मैं व्यक्तिगत रूप से आभारी हूं। वे बिना आवाज के बच्चे हैं।
वहीं दिल्ली सरकार और अन्य अधिकारियों के वकील ने मामले में निर्देश लेने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने उन्हें समय प्रदान करते हुए कहा कि जवाब समाज कल्याण विभाग, दिल्ली सरकार के सचिव द्वारा दायर किया जाना चाहिए। अब इस मामले की सुनवाई 29 जुलाई को होगी। याचिका में स्कूलों में छात्रावास के लिए सीबीएसई के साथ-साथ वार्डन के मानदंडों के अनुसार नियमित योग्य प्राचार्य और नियमित योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों से निर्देश देने का आग्रह किया गया है। याचिका में छात्रों को ब्रेल पुस्तकों, सहायक उपकरणों की सुविधा और स्कूल में उनके लिए कंप्यूटर लैब और ई-लाइब्रेरी स्थापित करने की भी मांग की है।