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दिल्ली दंगा: अधूरी जांच पर SI को कोर्ट ने जांच से हटाया,अदालत ने मूल्यांकन के लिए पुलिस आयुक्त को भेजा

Sun, 14 May 2023 10:56 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Sun, 14 May 2023 10:56 PM IST
सार

न्यायाधीश ने पिछले सप्ताह जारी एक आदेश में पुलिस आयुक्त को एसआई विपिन कुमार की तरफ से इस मामले में की गई जांच और उच्चाधिकारियों को तथ्यों की गलत जानकारी देने का मूल्यांकन करने का निर्देश दिया।

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Court removes SI from investigation on incomplete investigation
दिल्ली दंगा (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की एक अदालत ने 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में लापरवाह और गैर पेशेवर आचरण के कारण एक एसआई को जांच से हटा दिया। साथ ही जांच के मूल्यांकन के लिए इसे पुलिस आयुक्त के पास भेज दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला खजूरी खास थाने में कुछ लोगों के खिलाफ दंगा, चोरी, लूट और आगजनी सहित दूसरी धाराओं के तहत दर्ज एक मामले की सुनवाई कर रहे थे।

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न्यायाधीश ने पिछले सप्ताह जारी एक आदेश में पुलिस आयुक्त को एसआई विपिन कुमार की तरफ से इस मामले में की गई जांच और उच्चाधिकारियों को तथ्यों की गलत जानकारी देने का मूल्यांकन करने का निर्देश दिया। इस मामले में बाद में 10 शिकायतें जोड़ी गई थीं। अदालत ने एक मई को प्रत्येक घटना के समय समेत संबंधित सबूत देने के लिए पुलिस उपायुक्त (उत्तर-पूर्व) से जवाब मांगा था। इस मामले को डीसीपी को भेजकर जांच अधिकारी की तरफ से की गई प्रारंभिक जांच का आकलन करने के लिए कहा था। इसमें रिकॉर्ड पर पर्याप्त साक्ष्य नहीं लाए गए। 

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प्रत्येक शिकायत की क्या वास्तव में समय पर जांच की गई और आरोपियों पर किस आधार पर अंगुली उठाई गई। 10 मई को बाद की कार्यवाही के दौरान न्यायाधीश ने डीसीपी की रिपोर्ट के अनुसार कहा कि आईओ से एक रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन इसे उपयुक्त नहीं पाया गया। मौजूदा एसएचओ और जांच अधिकारी को अदालत को अधिक विशिष्ट सारांश प्रदान करने का निर्देश दिया गया था। सहायक पुलिस आयुक्त और खजूरी के एसएचओ न्यायाधीश ने रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि खास पुलिस थाने को पूरे मामले की समीक्षा और अगर जरूरत हो तो जांच किसी दूसरे अधिकारी से करवाने का निर्देश दिया गया।

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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह बताने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए गए कि प्रत्येक शिकायत के संबंध में क्या वास्तव में जांच की गई। प्रत्येक घटना का समय और आरोपियों पर अंगुली उठाने का आधार भी पूछा। न्यायाधीश ने 10 मई को सुनवाई के दौरान कहा था कि डीसीपी की रिपोर्ट के मुताबिक जांच अधिकारी की रिपोर्ट सही नहीं थी।


न्यायाधीश ने कहा कि एसआई कुमार ने वरिष्ठ अधिकारी को दी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि एक शिकायतकर्ता ने बताया था कि भीड़ ने 25 फरवरी 2020 को सुबह 11 बजे मकानों में आग लगाई थी। इस मामले में 10 शिकायतों को जोड़ा गया, लेकिन आरोप पत्र तथा गवाहों के बयान में कई घटनाओं के समय का उल्लेख नहीं है। अदालत ने कहा कि घटना का वक्त जांच का अहम हिस्सा है और अधूरी जांच के कारण अदालत अभी तक आरोप तय नहीं कर सकी है। मामले पर अगली सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तारीख तय की गई है।

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