'शादीशुदा महिला से शारीरिक संबंध बनाना अपराध नहीं हो सकता'
दुष्कर्म के आरोप साबित न होने पर आरोपी को अदालत ने किया बरी
शादीशुदा महिला को शादी का झांसा देकर गुमराह नहीं किया जा सकता-अदालत
- दुष्कर्म के आरोप साबित न होने पर आरोपी को अदालत ने किया बरी
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नशीला पदार्थ पिलाकर महिला से दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी को ठोस साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि जिस महिला ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप लगाया, वह पहले से शादीशुदा थी और उसने तलाक भी नहीं लिया था।
इसके बावजूद उसने आरोपी से शारीरिक संबंध बनाए जो आपसी सहमति से थे। ऐसे हालात में इसे दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता। तीस हजारी अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रमेश कुमार-द्वितीय ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष शख्स पर लगाए गए दुष्कर्म के आरोपों को साबित करने में नाकामयाब रहा है।
मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए अदालत ने कहा कि शादीशुदा महिला को शादी का झूठा वादा करके गुमराह किया जा सके यह संभव नहीं है। महिला की गवाही से भी यह स्पष्ट है कि आरोपी और महिला लिव-इन संबंध में थे और उनके बीच जो संबंध बने वह उनकी आपसी सहमति से बने।
'गवाही विश्वसनीय नहीं'
अभियोजन पक्ष के अनुसार महिला की शिकायत पर सीता राम शर्मा के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 328 और 376 के तहत एक जनवरी 2015 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। चूंकि अभियोजन पक्ष की गवाही विश्वसनीय नहीं है, इसलिए अदालत आरोपी को बरी करती है।
वहीं बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि महिला ने पैसे ऐंठने के लिए उनके मुव्वकिल पर झूठा आरोप लगाया है। महिला अपनी मर्जी से ही लिव-इन में रह रही थी और फिर कॉफी में नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म का आरोप लगा दिया।