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हिमाचल के पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी पर सीबीआई को आरोप तय करने का निर्देश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 10 Dec 2018 09:47 PM IST
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फाइल फोटो
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अदालत ने हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह समेत नौ आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में आरोप तय करने का निर्देश दिया है। सीबीआई का आरोप है कि वीरभद्र सिंह ने केंद्रीय मंत्री रहते हुये 10 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति अर्जित की। जांच के दौरान उनकी संपत्ति घोषित आय से 192 फीसदी अधिक पाई गई थी।
पटियाला हाउस अदालत के विशेष सीबीआई जज अरुण भारद्वाज ने वीरभद्र सिंह समेत सभी आरोपियों पर आरोप निर्धारित करने के लिये सात जनवरी 2019 की तारीख तय की है। इस मामले में अदालत ने वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी को 29 मई 2017 को जमानत प्रदान कर दी थी।
सीबीआई ने इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 109, 465, 471 और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2), उपधारा 13(1)(ई)के प्रावधानों के तहत 500 पन्नों की चार्जशीट तीन अप्रैल 2017 को दाखिल की थी। एजेंसी ने चार्जशीट में 225 गवाहों व 442 दस्तावेजों का हवाला दिया था।
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सीबीआई ने 23 सितंबर 2016 को वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान और एक सहयोगी चुन्नी लाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
सीबीआई ने आरोप पत्र में तर्क रखा है कि वीरभद्र सिंह 28 मई 2009 से 18 जनवरी 2011 और 19 जनवरी 2011 से 26 जून 2012 के दौरान केंद्र सरकार में बतौर मंत्री रहते हुये 10 करोड़ रुपये की संपत्ति कथित तौर पर आय से अधिक अर्जित की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पांच नवंबर 2016 को वीरभद्र सिंह की याचिका हिमाचल प्रदेश से दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दी थी।
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पटियाला हाउस अदालत के विशेष सीबीआई जज अरुण भारद्वाज ने वीरभद्र सिंह समेत सभी आरोपियों पर आरोप निर्धारित करने के लिये सात जनवरी 2019 की तारीख तय की है। इस मामले में अदालत ने वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी को 29 मई 2017 को जमानत प्रदान कर दी थी।
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सीबीआई ने इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 109, 465, 471 और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2), उपधारा 13(1)(ई)के प्रावधानों के तहत 500 पन्नों की चार्जशीट तीन अप्रैल 2017 को दाखिल की थी। एजेंसी ने चार्जशीट में 225 गवाहों व 442 दस्तावेजों का हवाला दिया था।
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सीबीआई ने 23 सितंबर 2016 को वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान और एक सहयोगी चुन्नी लाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
सीबीआई ने आरोप पत्र में तर्क रखा है कि वीरभद्र सिंह 28 मई 2009 से 18 जनवरी 2011 और 19 जनवरी 2011 से 26 जून 2012 के दौरान केंद्र सरकार में बतौर मंत्री रहते हुये 10 करोड़ रुपये की संपत्ति कथित तौर पर आय से अधिक अर्जित की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पांच नवंबर 2016 को वीरभद्र सिंह की याचिका हिमाचल प्रदेश से दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दी थी।