जेएनयू देशद्रोह मामले में कन्हैया की जमानत पर कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
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देशद्रोह के मामले में आरोपी जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की अंतरिम जमानत रद्द की जाए या नहीं, हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
न्यायमूर्ति पीएस तेजी के समक्ष पेश दिल्ली सरकार के अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि सरकार का मानना है कि कन्हैया की अंतरिम जमानत रद्द नहीं की जानी चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए विशेष सरकारी वकील शैलेंद्र बब्बर ने अदालत को बताया कि कन्हैया ने अंतरिम जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है।
अब इस पर अदालत फैसला ले की उसकी जमानत रद्द की जानी है या नहीं। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद कहा कि जल्द ही इस मुद्दे पर अपना निर्णय सुनाएंगे।
न्यायमूर्ति ने याचिकाकर्ता के वकील के तर्कों पर जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने याचिकाकर्ता वकील आरपी लूथरा के तर्कों पर आपत्ति जताई। उन्होंने लूथरा को अपने तर्कों में राजनीति को दूर रखने की हिदायत दी।
कई बार अदालत ने लूथरा को चेतावनी दी कि वह उपयुक्त शब्दों का चयन करें नहीं तो उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
28 अप्रैल को अदालत ने अंतरिम जमानत रद्द करने के लिए लूथरा की ओर से दायर याचिका सुनने के लिए स्वीकार की थी। लूथरा ने तर्क रखा था कि अदालत ने जमानत देते समय कन्हैया को देश विरोधी गतिविधियों से दूर रहने का निर्देश दिया था।
कन्हैया ने जमानत मिलने के बाद शर्तों का उल्लंघन कर देश विरोधी भाषण दिया और लगातार ऐसी गतिविधियों में लिप्त है। इसके बावजूद पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही।
कन्हैया को जेएनयू परिसर में 9 फरवरी को देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। हाईकोर्ट ने 2 मार्च का उसे सशर्त छह माह के लिए अंतरिम जमानत प्रदान कर दी थी।