'जज साहब! छोड़ दीजिए, इसने नहीं किया रेप'
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पहले रेप का मामला दर्ज करवाने व फिर अदालत में गवाही से पीड़ित युवतियों के मुकरने के मामलों को अदालत ने गंभीरता से लिया है।
अदालत ने कहा कि ऐसे बढ़ते मामलों को देख कर यह तय करने की जरूरत है कि क्या बलात्कार के आरोप से बरी व्यक्ति को क्या उसी तरह रेप केस सर्वाइवर संबोधित किया जाना चाहिए जैसा ऐसे मामलों में पीड़िता के लिए किया जाता है।
तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश निवेदिता अनित शर्मा ने रेप के एक मामले में पीड़ित युवती के बयानों से मुकरने के आधार पर आरोपी बनाए गए युवक को बरी करते हुए उक्त टिप्पणी की।
अदालत ने 29 अक्तूबर को दिए फैसले में कहा इस मामले में पीड़िता ने अपने बयानों में साफ कहा है कि उसके साथ रेप नहीं हुआ और उसने स्वयं आग्रह किया है कि आरोपी बनाए गए युवक को बरी कर दिया जाए।
हत्या की धमकी देकर रेप का आरोप
अदालत ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में बरी किए गए आरोपी जिन्हें सम्मानित ढंग से बरी किया गया है उन्हें क्या अब रेप केस सर्वाइवर के रूप में संबोधित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा यह हमें वर्तमान परिस्थितियों में बलात्कार के मामलों की सत्यता के बारे में सोचने को मजबूर करता है।
अदालत ने कहा कि आज लोगों में इस बात को लेकर आक्रोश है और शोर मच रहा है कि अदालतें बलात्कार के आरोपी को दोषी नहीं करार दे रही हैं। हालांकि बलात्कार के आरोपी व्यक्ति को दोषी तब तक नहीं करार दिया जा सकता जब तक गवाह पीड़िता के मामलों को पुष्ट नहीं करता हो या ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया जाता हो।
अभियोजन पक्ष के अनुसार पिछले वर्ष जून माह में थाना निहाल विहार क्षेत्र निवासी महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसके पुत्र की हत्या की धमकी देकर लगातार चार माह रेप किया। इसके अलावा आरोपी ने उसके घर से जेवरात व दो लाख रुपये नगर भी चुरा लिए थे।
अदालत ने युवती की शिकयत के आधार पर आरोपी के खिलाफ रेप, चोरी व जान से मारने की धमकी के आरोप में अभियोग तय कर दिए थे। ट्रायल के दौरान पीड़िता अपने बयानों से मुकर गई और अदालत से आरोपी को रिहा करने का आग्रह करते हुए कहा कि उसके साथ रेप नहीं हुआ था और उसने गलत तरीके से रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
युवती से मारपीट मामले में आरोप तय
अदालत ने साकेत स्थित मॉल के पास एक युवती की कार से टक्कर के दौरान उससे मारपीट व छेड़छाड़ के तीन आरोपियों के खिलाफ अभियोग तय कर दिए।
साकेत अदालत स्थित मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नीति फुटेला ने अपने फैसले में कहा कि सभी गवाहों के बयानों व साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आरोपी सलीम, रियाज व सालिम ने घटना के समय युवती की कार में टक्कर लगने के बाद उससे मारपीट व छेड़छाड़ की और उसे गैरकानूनी रूप से रास्ते में रोका। ऐेसे में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य है।
अदालत ने तीनों आरोपियों से उनके अपराध के संबंध में पूछा तो उन्होंने अपराध स्वीकार करने से इनकार करते हुए उन्हें फर्जी मामले में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि वे मुकदमा लड़ना चाहते हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 6 जनवरी 2014 की रात युवती अपने दोस्त के साथ कार से मुनिरका की तरफ से सलेक्ट सिटी मॉल आ रही थी। इसी दौरान आरोपियों की कार से उनकी कार टच होने से झगड़ा हो गया व आरोपियों ने उसकी पिटाई कर दी थी।