यासीन मलिक की पेशी पर कोर्ट की नाराजगी: जेल प्रशासन ने बिठाई जांच, तीन दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
दरअसल, आतंकी फंडिंग मामले में आजीवन सजा काट रहा यासीन मलिक इस वक्त तिहाड़ जेल नंबर-7 में बंद है। मलिक को जम्मू कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत में पेश किया जाना था।
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सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के कमांडर यासीन मलिक के व्यक्तिगत रूप से पेश होने के मामले को तिहाड़ जेल महानिदेशक संजय बेनीवाल ने गंभीरता से लिया है। महानिदेशक ने इसके विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी उप-महानिरीक्षक (मुख्यालय) (कारागार) राजीव सिंह को सौंपी गई है। साथ ही जांच रिपोर्ट को तीन दिन के भीतर जेल महानिदेशक को सौंपने के लिए कहा गया है। सूत्र बताते हैं कि शुरुआती जांच में जेल अधिकारियों की चूक सामने आई है।
दरअसल, आतंकी फंडिंग मामले में आजीवन सजा काट रहा यासीन मलिक इस वक्त तिहाड़ जेल नंबर-7 में बंद है। मलिक को जम्मू कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत में पेश किया जाना था। कैदी की वर्चुअल पेशी भी संभव है। बावजूद इसके मलिक को शुक्रवार सुप्रीम अदालत में पेश किया गया। जेल सूत्रों की मुताबिक, इस पर शीर्ष अदालत ने सख्त नाराजगी जाहिर की। मामला संज्ञान में आने पर तिहाड़ जेल प्रशासन के होश उड़ गए। आला अधिकारियों ने कनिष्ठ अधिकारियों को फटकार लाई।
मामले की संजीदगी को देखते हुए पूरे मामले की जांच के आदेश दिए। डीजी ने इसकी जिम्मेदारी राजीव सिंह को दी है। अधिकारिक सूत्र बताते हैं कि मामले की जांच भी शुरू हो गई है। शुरुआती जांच में पता चला है कि जेल नंबर सात के अधिकारियों ने इसमें चूक की है। उनने वर्चुअल पेशी की संभावना पर काम नहीं किया। इसकी जगह उसे व्यक्तिगत रूप में अदालत में पेश किया। सूत्रों का कहना है कि तीन दिन में जांच रिपोर्ट्र मिलने के बाद इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी हो सकती है।