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एसएचओ को देंगे बुनियादी कानूनी प्रक्रिया का प्रशिक्षण, नाराज कोर्ट ने दिया निर्देश
Mon, 05 Aug 2019 08:54 AM IST
पूजा त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Mon, 05 Aug 2019 08:54 AM IST
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- फोटो : डेमो
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दिल्ली थाना छावला के एसएचओ को बुनियादी कानूनी प्रावधानों, प्रक्रिया और सिद्घांतों का एक सप्ताह का प्रशिक्षण देने का निर्देश अदालत ने डीसीपी द्वारका को दिया है। 2018 में दर्ज हत्या के मामले में जरूरी रिपोर्ट एसएचओ द्वारा पेश न किए जाने पर कोर्ट ने यह आदेश दिया है।
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साथ ही, द्वारका जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोनू अग्निहोत्री ने सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बिना मामले में पूरक आरोप पत्र दाखिल करने और जानबूझकर रिपोर्ट दाखिल न करने पर एसएचओ के खिलाफ जांच कर 4 सितंबर तक रिपोर्ट भी मांगी है।
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अदालत ने अपने निर्देश में कहा कि सहायक सब इंस्पेक्टर (एएसआई) ने एचएचओ की ओर से एफएसएल से प्राप्त बैलेस्टिक रिपोर्ट डीसीपी की स्वीकृति के बिना ही कोर्ट में दाखिल कर दी।
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इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि आर्म्स एक्ट की धाराओं में पूरक आरोप पत्र स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष दाखिल किया जाना था और वहां से संज्ञान होने के बाद इस कोर्ट में आना चाहिए था। ऐसा लगता है कि एसएचओ को इन बुनियादी कानूनी प्रावधानों व प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं है।
कोर्ट को बताया गया कि पुलिस ने इस मामले में 2018 में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था, लेकिन डिजीटल वीडियो रिकॉर्डर की एफएसएल रिपोर्ट एक साल बाद भी एचएचओ ने दाखिल नहीं की है। इस कारण मामले में गवाहों के बयान दर्ज नहीं हो पाए हैं।
इसके अलावा, दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव की ओर से पत्र लिखकर गवाहों के बयान अगली तारीख पर दर्ज कराने का आग्रह किया गया है, क्योंकि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं।
कोर्ट ने कहा कि एफएसएल ने 29 अक्तूबर 2018 को बैलेस्टिक रिपोर्ट और 12 नवंबर 2018 को बायोलॉजिकल रिपोर्ट पुलिस को दे दी थी। इसके बाद भी पूरक आरोप पत्र दाखिल करने में पुलिस ने चार माह का समय लगा दिया।