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24 साल चली सुनवाई, नहीं मिले ठोस सबूत और गवाह, कोर्ट ने दोनों आरोपियों को किया बरी
Tue, 11 Jun 2019 11:26 PM IST
शाहरुख खान
धीरज बेनीवाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
धीरज बेनीवाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 11 Jun 2019 11:26 PM IST
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24 साल चली सुनवाई में दिल्ली पुलिस ऐसा कोई गवाह या साक्ष्य पेश नहीं कर सकी जिसके आधार पर 13 लाख रुपये के गबन के आरोपियों को दोषी साबित किया जा सके। लिहाजा, अदालत ने विरोधाभासी गवाह व साक्ष्यों के अभाव में दोनों आरोपियों को 24 साल पुराने मामले से बरी कर दिया।
मामला 1994-1995 में 13 लाख रुपये के कटे फटे नोटों के गबन से जुड़ा है। पटियाला हाउस अदालत के महानगर दंडाधिकारी धर्मेंद्र सिंह ने मामले में आरोपी बर्खास्त सहायक प्रबंधक पीवीएन राव व नरेंद्र कुमार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इस मामले में पुलिस जरूरी दस्तावेज व बयान भी पेश नहीं कर पाई।
दिल्ली पुलिस ने 13 लाख रुपये के गबन में इंडियन ओवरसीज बैंक की सफदरजंग एंक्लेव स्थित शाखा के सहायक प्रबंधक के खिलाफ थाना सरोजनी नगर में 1996 में मुकदमा दर्ज किया था।
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1997 में दो आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया और इसके 11 साल बाद अदालत ने 15 अप्रैल 2008 को अमानत में खयानत व आपराधिक साजिश की धाराओं में आरोप तय किए।
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मामला 1994-1995 में 13 लाख रुपये के कटे फटे नोटों के गबन से जुड़ा है। पटियाला हाउस अदालत के महानगर दंडाधिकारी धर्मेंद्र सिंह ने मामले में आरोपी बर्खास्त सहायक प्रबंधक पीवीएन राव व नरेंद्र कुमार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इस मामले में पुलिस जरूरी दस्तावेज व बयान भी पेश नहीं कर पाई।
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दिल्ली पुलिस ने 13 लाख रुपये के गबन में इंडियन ओवरसीज बैंक की सफदरजंग एंक्लेव स्थित शाखा के सहायक प्रबंधक के खिलाफ थाना सरोजनी नगर में 1996 में मुकदमा दर्ज किया था।
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1997 में दो आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया और इसके 11 साल बाद अदालत ने 15 अप्रैल 2008 को अमानत में खयानत व आपराधिक साजिश की धाराओं में आरोप तय किए।
शिकायतकर्ता ने दिया विरोधाभासी बयान
कोर्ट के समक्ष बचाव पक्ष के वकील दीपक शर्मा से जिरह में शिकायतकर्ता सेवानिवृत्त मुख्य प्रबंधक एल बाला सुब्रमण्यन ने कहा कि उन्होंने इस मामले की शिकायत दर्ज करवाई थी। पुलिस ने उसका बयान एफआईआर दर्ज होने के बाद भी दर्ज नहीं किया।
आरोपियों से उसकी मौजूदगी में कोई दस्तावेज बरामद नहीं किया गया था। इसके अलावा नरेंद्र कुमार उस समय बैंक में क्लर्क था या नहीं इसकी कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि एक अन्य मामले में उसे निलंबित कर दिया गया था। इसके अलावा वह दोनों आरोपियों को पहचान भी नहीं पाया।
जांच की खामियां
केस की जांच से जुड़े रहे पुलिसवालों ने भी माना कि दोनों में किसी भी आरोपी से कोई नकदी बरामद नहीं हुई थी। उन्होंने कटे-फटे नोटों की इंट्री करने वाला रजिस्टर डीएन-2 भी अपने कब्जे में नहीं लिया था।
इसके बैंक की ऑडिट रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश नहीं की। इस मामले का खुलासा मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय की शिकायत पर हुआ था, लेकिन वहां के किसी अधिकारी का बयान पुलिस ने दर्ज नहीं किया।
आरोपियों से उसकी मौजूदगी में कोई दस्तावेज बरामद नहीं किया गया था। इसके अलावा नरेंद्र कुमार उस समय बैंक में क्लर्क था या नहीं इसकी कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि एक अन्य मामले में उसे निलंबित कर दिया गया था। इसके अलावा वह दोनों आरोपियों को पहचान भी नहीं पाया।
जांच की खामियां
केस की जांच से जुड़े रहे पुलिसवालों ने भी माना कि दोनों में किसी भी आरोपी से कोई नकदी बरामद नहीं हुई थी। उन्होंने कटे-फटे नोटों की इंट्री करने वाला रजिस्टर डीएन-2 भी अपने कब्जे में नहीं लिया था।
इसके बैंक की ऑडिट रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश नहीं की। इस मामले का खुलासा मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय की शिकायत पर हुआ था, लेकिन वहां के किसी अधिकारी का बयान पुलिस ने दर्ज नहीं किया।
ये था मामला
बैंक के मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय ने 20 नवंबर 1995 को क्षेत्रीय कार्यालय को शिकायत की थी कि उसके क्षेत्र के बैंकों द्वारा भेजे गए 13 लाख रुपये के कटे-फटे नोटों के बदले में राशि को उनके खातों में क्रेडिट नहीं किया है। इन कटे-फटे नोटों के काउंटर की जिम्मेदारी पीवीएन राव पर थी और उसके साथ नरेंद्र कुमार क्लर्क था।
इन नोटों की इंट्री डीएन-2 रजिस्टर में की जाती थी। इनके खिलाफ पुलिस को बालासुब्रमण्यन ने आरोप लगाया कि इन दोनों ने मिलीभगत कर 13 लाख का गबन किया और नरेंद्र ने यह रकम अपने भाई अश्विनी कुमार को दे दी थी। हालांकि, साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने अश्विनी कुमार को आरोप मुक्त कर दिया था।
इन नोटों की इंट्री डीएन-2 रजिस्टर में की जाती थी। इनके खिलाफ पुलिस को बालासुब्रमण्यन ने आरोप लगाया कि इन दोनों ने मिलीभगत कर 13 लाख का गबन किया और नरेंद्र ने यह रकम अपने भाई अश्विनी कुमार को दे दी थी। हालांकि, साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने अश्विनी कुमार को आरोप मुक्त कर दिया था।