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जंग के दखल से जामिया में बदला पीएम मोदी के विरोध का रंग

Sat, 28 Nov 2015 07:54 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 28 Nov 2015 07:54 PM IST
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Corrosion resistance of the PM's intervention changed the tone in Jamia

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर शिक्षकों के विरोध का रूख नरम पड़ गया है।

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छात्रों के साथ शिक्षकों के विरोध के चलते पूर्व कुलपति व उपराज्यपाल नजीब जंग के दखल के चलते अब शिक्षकों ने नरम रूख अपनाया है। हालांकि पूर्व छात्रों का बड़ा वर्ग अभी भी विरोध में खड़ा है।

जामिया के वार्षिक दीक्षांत समारोह में हर वर्ष किसी प्रमुख हस्ती को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया जाता है। वर्ष 2014 के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने छात्रों को डिग्री दी थी।
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इसी के तहत विश्वविद्यालय ने वर्ष 2015 के समारोह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण भेजा था। जामिया प्रबंधन के निमंत्रण की खबर सार्वजनिक होते ही शिक्षकों के साथ पूर्व छात्र भी विरोध में उठ खड़े हुए थे।
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'पीएम का दौरा होगा विश्वविद्यालय की बेहतरी का कदम'

Corrosion resistance of the PM's intervention changed the tone in Jamia

छात्र व शिक्षक मोदी के पूर्व में दिए गए बयान का विरोध जता रहे हैं, जिसमें वर्ष 2008 में बटला एनकाउंटर के दौरान जामिया के दो छात्रों का नाम आतंकवादी घटना में आने के बाद तत्कालीन कुलपति ने दोनों के लिए कानूनी सहायता विश्वविद्यालय के खर्चे पर करने की घोषणा की थी।

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री के निमंत्रण के बढ़ते विरोध को देखते हुए पूर्व कुलपति ने जामिया प्रबंधन से बात करते हुए शिक्षकों से बात करने को कहा।

साथ ही शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि पुराने मुद्दों को न छेडे़। प्रधानमंत्री का जामिया का दौरा एक नया इतिहास रचेगा, जोकि विवि की बेहतरी के लिए बड़ा कदम होगा।

सूत्रों के मुताबिक, पूर्व कुलपति के कार्यकाल के दौरान कैंपस में कई बड़े बदलाव हुए थे, जिसके चलते विश्वविद्यालय की साख भी सुधरी थी।

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