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अफसरों ने खुद ही तय कर दिया 4जी टावरों का किराया
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 30 Apr 2014 11:46 PM IST
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नगर निगम सीमा क्षेत्र में 4जी नेटवर्क के टावरों के किराया निर्धारण में भी अफसरों ने एकतरफा निर्णय लिया। टावरों का किराया तय करने का प्रस्ताव बिना निगम बोर्ड में प्रस्तुत किए ही निर्धारित कर दिया गया।
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पार्षदों का आरोप है कि सर्किल रेट के आधार पर किराए की रकम तय करने की बजाय निगम अफसरों ने महज पांच-छह हजार रुपये सालाना किराया तय कर दिया।
इससे निगम को घाटा और 4जी नेटवर्क कंपनी को करोड़ों रुपयों का फायदा पहुंचाया गया। अब आचार संहिता समाप्त होने के बाद यह मुद्दा फिर निगम बोर्ड और कार्यकारिणी समिति की बैठक में गूंजेगा।
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करीब एक साल से विवादों में घिरे 4जी नेटवर्क से निगम को करोड़ों रुपया सालाना की इनकम हो सकती थी। निगम अधिकारियों ने अंडरग्राउंड वायर जंक्शन बॉक्स (मैनहोल) और रोड कटिंग शुल्क पूरा माफ कर दिया।
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टावर का किराया भी नाममात्र तय किया। पार्षदों ने विरोध किया तो निगम प्रशासन ने मामला शासन को रेफर कर दिया था।
भाजपा पार्षद दल के नेता मुकेश त्यागी का कहना है कि मेरठ में जानकारी करने पर पता चला कि किराया सर्किल रेट के हिसाब से सात फीसदी प्रति टावर तय किया गया है। जबकि गाजियाबाद में इसके लिए बेहद कम रकम तय कर अफसरों ने मनमानी की है।
उनका कहना है कि अब शासन ने निगम सदन को किराया तय करने के आदेश दिए हैं। ऐसे में सदन में प्रस्ताव लाकर पुराने प्रस्ताव को निरस्त कराएंगे। इसमें शामिल अधिकारियों की शासन से लिखित शिकायत कर कार्रवाई की मांग करेंगे।