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डरना जरूरी है: दिल्ली में पहली बार दिसंबर में बढ़ा कोरोना, अक्तूबर की तुलना में दोगुना मौतें भी
Fri, 31 Dec 2021 07:42 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 31 Dec 2021 07:42 PM IST
सार
इंडिया डाटा पोर्टल के अनुसार इस साल 26 मई को राजधानी में एक हजार से अधिक लोग कोरोना संक्रमित मिले थे। उसके बाद हर दिन संख्या कम दर्ज की गई। अभी तक दिल्ली में 14.46 लाख लोग संक्रमित मिल चुके हैं जिनमें से 14.18 लाख मरीज ठीक हुए हैं लेकिन 25107 मरीजों की जिंदगी चली गई।
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कोरोना वार्ड
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
21 महीने से दिल्ली कोरोना महामारी का सामना कर रही है लेकिन पहली बार दिसंबर माह संक्रमण के लिहाज से सबसे अधिक गंभीर मिला। मार्च 2020 से अब तक पहली बार दिसंबर में न सिर्फ कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े हैं बल्कि संक्रमण की वजह से मौत की संख्या भी बढ़ी है। अगर इसी साल के अक्तूबर माह से तुलना करें तो यह बढ़ोतरी दोगुना तक दर्ज की गई है। हालांकि दिसंबर में संक्रमण बढ़ने पर विशेषज्ञों की राय भी अलग अलग है।
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कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब ओमिक्रॉन वैरिएंट का असर है जबकि कुछ का कहना है कि वायरस का अनुकूलन हुआ है।पिछले साल दिसंबर माह का सर्द मौसम उसके लिए नया था लेकिन अब उसके अनुकूल है। इसके कुछ प्रमाण भी सामने आए हैं लेकिन उससे पहले आंकड़ों की बात करें तो एक से 30 दिसंबर के बीच दिल्ली में कोरोना संक्रमण से नौ लोगों की मौत हुई है। अक्तूबर माह में चार मरीजों की मौत हुई थी और उससे पहले सितंबर माह में पांच मरीजों की मौत हुई। आंकड़ों से यह भी पता चला है कि नवंबर माह के आखिरी दो सप्ताह में ही संक्रमण के ग्राफ में उतार चढ़ाव दिखाई देने लगे थे। इस नवंबर माह में सात लोगों की मौत हुई थी।
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इंडिया डाटा पोर्टल के अनुसार इस साल 26 मई को राजधानी में एक हजार से अधिक लोग कोरोना संक्रमित मिले थे। उसके बाद हर दिन संख्या कम दर्ज की गई। अभी तक दिल्ली में 14.46 लाख लोग संक्रमित मिल चुके हैं जिनमें से 14.18 लाख मरीज ठीक हुए हैं लेकिन 25107 मरीजों की जिंदगी चली गई।
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हाल ही में कोरोना वायरस और मौसम के बीच आपसी संबंध को लेकर अध्ययन कर चुके केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के डॉ. मनीष बताते हैं कि वायरस पर मौसम का असर काफी है। मेडरेक्सिव जर्नल में मार्च 2021 को प्रकाशित इस अध्ययन में पता चला कि जिन शहरों में तापमान 20 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा, वहां दूसरी लहर बाकी जगहों की तुलना में जल्दी आई लेकिन इसके बाद वायरस का अनुकूलन देखने को मिला है। जिन इलाकों में तापमान 20 डिग्री से काफी नीचे है वहां लगातार संक्रमण बढ़ने के मामले सामने आ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों में भी पिछले कई दिनों से यह असर देखने को मिल रहा है।
डॉ. मनीष ने उदाहरण देते हुए बताया कि दिल्ली में कोरोना के मामले सबसे पहले मई से जून 2020 के बीच बढ़े थे जिसे पहली लहर मानते हैं। इसके बाद अगस्त से सितंबर और अक्तूबर से नवंबर के बीच दो लहर आईं। नवंबर के बाद मामले घटते चले गए लेकिन फिर मार्च से अप्रैल के बीच नई लहर आई। अगर इसे आधार मानें तो दिसंबर, जनवरी, फरवरी, मार्च के शुरुआती सप्ताह और जुलाई में संक्रमण घटा था। यह पिछले साल तक की स्थिति थी जब वायरस मौसम के लिए नया था लेकिन इस बार ठीक विपरीत्त दिसंबर में असर देखने को मिल रहा है जब संक्रमण लगातार बढ़ रहा है और मौतें भी हो रही हैं।
वहीं नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के वरिष्ठ पल्मोनरी विशेषज्ञ डॉ. अमित बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के प्रसार में ओमिक्रॉन की भूमिका भी अहम है। यह काफी तेज वैरिएंट है जिसमें संक्रमण की आर वैल्यू दो अंक तक पहुंच सकती है। यानि ओमिक्रॉन संक्रमित एक मरीज अपने संपर्क में आने वाले 70 से 80 लोगों को संक्रमित कर सकता है।