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कोरोना के असर: स्कूलों के नहीं खुलने से बदहाल हुए ट्रांसपोर्टर, गाड़ी बेचने तक को हुए मजबूर
Mon, 31 Jan 2022 05:38 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Mon, 31 Jan 2022 05:38 PM IST
सार
एप्सा के अध्यक्ष लक्ष्य छाबड़िया का कहना है कि दिल्ली के तमाम सरकारी व प्राइवेट स्कूल बीते दो साल से अधिक समय से बंद हैं। इसका सीधा असर स्कूलों से जुड़े ट्रांसपोर्टर पर पड़ रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
कोरोना महामारी के कारण स्कूल करीब दो साल से बंद है। संक्रमण की रफ्तार धीमी पड़ने पर नौवीं से बारहवीं तक की कक्षाओं के लिए स्कूलों को खोला गया है। लेकिन स्कूलों तक बच्चों को लाने ले जाने के लिए परिवहन की सुविधा नहीं दी जा रही है। ऐसे में बीते दो साल से ज्यादा समय से स्कूल ट्रांसपोर्टर्स बदहाली में गुजर बसर कर रहे हैं। स्कूल बंद होने के कारण उनके पास आय का साधन नहीं है। कई कैब चालक कर्ज लेकर गाड़ियों की किश्तें भरने को मजबूर हैं।
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स्कूली ट्रांसपोर्टरों की ऐसी स्थिति को देखते हुए अर्फोडेबल प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन(एप्सा) ने सरकार से इन्हें मदद देने की मांग की है। एप्सा के अध्यक्ष लक्ष्य छाबड़िया का कहना है कि दिल्ली के तमाम सरकारी व प्राइवेट स्कूल बीते दो साल से अधिक समय से बंद हैं। इसका सीधा असर स्कूलों से जुड़े ट्रांसपोर्टर पर पड़ रहा है।
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स्कूल बंद होने से वे पूरी तरह बेरोजगार हो गए हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकार महामारी के दौर में गरीबों और मजदूरों को मदद मुहैया करा रही है, तो स्कूल कैब चालकों की मदद के लिए भी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने एक बार फिर से सरकार से मांग की है कि दिल्ली के तमाम स्कूल तुरंत प्रभाव से खोले जाएं ताकि स्कूली ट्रांसपोर्टर्स भुखमरी की कगार तक ना पहुंचें। यदि ऐसा संभव नहीं तो स्कूली ट्रांसपोर्टर्स को अलग से आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाए। इससे पहले स्कूल एसोसिएशन ने बीते सप्ताह उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखकर दिल्ली के तमाम स्कूलों को खोले जाने की मांग की थी।
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