फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Corona Effects: Not found in the blood bank and platelets

कोरोना इफेक्ट : ब्लड बैंक में नहीं मिल रहा खून और प्लेटलेट्स

Mon, 13 Apr 2020 03:13 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी जैनेंद्र ज्योति, अमर उजाला, नोएडा
जैनेंद्र ज्योति, अमर उजाला, नोएडा Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Mon, 13 Apr 2020 03:13 PM IST
सार

  • थैलासीमिया मरीजों को रक्त चढ़वाने के लिए लगाने पड़ रहे हैं चक्कर
  • रोटरी ब्लड बैंक में उपलब्ध है 30 यूनिट ओ पॉजिटिव 

विज्ञापन
Corona Effects: Not found in the blood bank and platelets
फाइल फोटो

विस्तार

सात साल की मासूम मेघना को एबी पॉजिटिव ब्लड चाहिए। उसके परिजन गाजियाबाद से नोएडा तक चक्कर काट रहे हैं। थैलासीमिया से पीड़ित मेघना को जल्द खून नहीं चढ़ाया गया तो हालत बिगड़ सकती है। मेघना जैसे न जाने कितने मरीज रोजाना ब्लड बैंकों की दहलीज से निराश लौट रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि लॉकडाउन के बाद जिले में एक भी रक्तदान शिविर नहीं लगा।
विज्ञापन


नियमित रक्तदाता भी ब्लड बैंक नहीं जा पा रहे हैं। इसलिए ब्लड बैंकों में खून और प्लेटलेट्स का स्टॉक कम होने लगा है। अग्रणी ब्लड बैंक रोटरी ब्लड बैंक, नोएडा चैरिटेबल ब्लड बैंक, ओम चैरिटेबल ब्लड बैंक और सरकारी ब्लड बैंक में ओ और बी पॉजिटिव को छोड़कर दूसरे ग्रुप का रक्त भी नहीं है। प्लेटलेट्स के लिए भी आकस्मिक समय में मारामारी जैसी स्थिति है।
विज्ञापन


रोटरी ब्लड बैंक में जहां आम दिनों में 60 यूनिट रक्त प्रतिदिन जमा होता था और हर महीने थैलासीमिया के 70 मरीज खून चढ़वाने आते थे वहां लॉकडाउन के बाद किसी ने रक्तदान नहीं किया है। इसलिए यहां ओ पॉजिटिव पीआरबीसी भी शनिवार को 28-30 यूनिट के आसपास उपलब्ध था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे में थैलासीमिया मरीजों, एक्सीडेंटल केस और गर्भवती महिलाओं के डिलीवरी केसों में ओ पॉजिटिव छोड़कर और किसी ग्रुप का खून नहीं मिल पा रहा। डॉ. भीमराव अंबेडकर सुपर स्पेशियलिटी सरकारी अस्पताल में भी अन्य ग्रुप का खून उपलब्ध नहीं है। इसलिए थैलासीमिया के मरीजों को रोटरी ब्लड बैंक भेजा जा रहा है।

सेक्टर-12, 22 स्थित नोएडा चैरिटेबल ब्लड बैंक में ओ और बी पॉजिटिव मिलाकर शनिवार को कुल 20-25 यूनिट उपलब्ध था, जबकि यहां खून चढ़वाने हर महीने थैलासीमिया के 30-35 मरीज आते हैं। यहां औसतन हर दिन 70 यूनिट रक्त मरीजों पर खर्च होता है। उधर, ओम चैरिटेबल हॉस्पिटल भी इससे अछूता नहीं है।

उधर, समाजसेवी राणा कमल, करण, मुकेश हिसारिया, अंकित राजगढ़िया और रविंद्र अत्तर सिंह धारीवाल का कहना है कि अगर प्रशासन की ओर से रक्तदान करने जाने वाले लोगों को पास उपलब्ध कराया जाए तो खून की कमी की यह समस्या खत्म करने में आसानी होगी।

रोटरी ब्लड बैंक के लिए रक्तदान शिविर की देखरेख करने वाले राज ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का निर्देश है कि हम सोसाइटीवासियों और नियमित रक्तदाताओं से संपर्क कर उनके बताए गए स्थान पर सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते हुए रक्तदान शिविर लगाएं। 

ब्लड बैंक में ए पॉजिटिव, बी पॉजिटिव, एबी पॉजिटिव, ए निगेटिव, बी निगेटिव, ओ निगेटिव और एबी निगेटिव ग्रुप के खून के लिए आने वाले जरूरतमंदों को या तो वापस लौटाना पड़ रहा है या फिर अपने स्तर से उस ग्रुप के डोनर का इंतजाम करना पड़ रहा है। जल्द कोई उपाय नहीं हुआ तो यहां ओ पॉजिटिव के जरूरतमंदों को भी परेशानी उठानी पड़ेगी।


-अतिकुर्रहमान, टेक्निकल मैनेजर-रोटरी ब्लड बैंक

 

थैलासीमिया मरीज को हर महीने एक बार में लगभग 2 यूनिट रक्त चढ़ाना पड़ता है। अगर सरकार की ओर से लोगों से अपील की जाए कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए वे रक्तदान करने ब्लड बैंक जरूर जाएं तो समस्या का समाधान हो सकता है।
-अनुराग आनंद, प्रशासनिक अधिकारी-नोएडा चैरिटेबल ब्लड बैंक 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed