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तांबे के लालच में चोरों ने ढहाया था रेलवे का सिग्नल रूम
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Mon, 29 Dec 2014 11:19 PM IST
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रेलवे के सिग्नल रविवार शाम किसी तकनीक गड़बड़ी से खराब नहीं हुए थे, बल्कि घने कोहरे का फायदा उठाकर तांबे के लालच में चोरों ने पूरा सिग्नल रूम ही ढहा दिया था।
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सिग्नल रूम गिरने से वायरिंग और रिले में फाल्ट आ गया और ट्रेनें बीच राह में रुक गईं। सोमवार को टेलीकॉम एक्सपर्ट की जांच में इसका खुलासा हुआ। दिल्ली से आए अधिकारियों सहित विशेषज्ञों की टीम ने मौका मुआयना किया।
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डीआरएम ने सीनियर डीएससी की अध्यक्षता में जांच टीम गठित कर दी है। विजयनगर कोतवाली में घटना की एनसीआर दर्ज कराई गई है।
दिल्ली-गाजियाबाद अप लाइनों के सिग्नल और एडवांस शटर खराब होने को अफसर तकनीकी खराबी मान रहे थे। जांच करने पहुंची टेलीकॉम टीम ने रिपोर्ट दी कि घने कोहरे का फायदा उठाकर चोरों ने हिंडन नदी पर मोर्चरी के पास स्थित सिग्नल रूम को ही ढहा दिया।
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सिग्नल रूम के मशीनों के ऊपर गिरने से सिग्नल रिले और केबल में फाल्ट आ गए। सिग्नल की वायरिंग खराब हो गई और सिग्नल ने काम करना बंद कर दिया।
डीआरएम एके सचान और डीटीएम देवेश चोपड़ा ने विशेषज्ञों के साथ सोमवार सुबह घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए। घटना की एनसीआर एसएसई केएम लाल ने विजयनगर कोतवाली में दर्ज कराई है।
सीनियर डीएससी अमित मल्होत्रा की अध्यक्षता में जांच टीम का गठन किया गया है। रेलवे अफसर जहां इसको करीब 7 लाख रुपये कीमत के तांबा केबल चोरी करने की कोशिश मानकर चल रहे हैं, वहीं आरपीएफ सिग्नल रूम के खुद ही ढहने का दावा कर रही है।
हो सकती थी बड़ी घटना
यदि कोहरा नहीं होता और ट्रेनों की गति तेज होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। रविवार शाम घटना के दौरान प्रयागराज, गोल्डन टेंपल, ऊंचाहार एक्सप्रेस, लखनऊ शताब्दी एक्सप्रेस और सीमांचल एक्सप्रेस यहां से निकलती हैं।
सिग्नल रूम को गिराने के पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। अफसर ऑन रिकार्ड इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं, लेकिन विरोधाभाषी बयान आ रहे हैं।
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सिग्नल रूम जर्जर था। इसकी सूचना अफसरों को दी गई थी। घटनास्थल के आसपास रात आठ बजे से पेट्रोलिंग शुरू हो जाती है। सिग्नल रूम इससे पहले ही गिर गया था। - पीके पंडा, असिस्टेंट कमांडेंट आरपीएफ