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दिव्यांगों को मिला कांग्रेस नेता का साथ, कल से धरने पर बैठेंगे सचिन चौधरी
Wed, 04 Dec 2019 04:12 PM IST
Trainee Trainee
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Wed, 04 Dec 2019 04:12 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : Social Media
यूपी कांग्रेस सचिव व अमरोहा से लोकसभा प्रत्याशी रहे सचिन चौधरी ने नौकरी को लेकर चल रहे दिव्यांगों के प्रदर्शन का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यदि दिव्यांगों को रेलवे ग्रुप-डी में नौकरी नहीं दी जाती तो वह गुरुवार से अनशन पर बैठेंगे।
सचिन चौधरी ने ट्वीट किया है कि प्रदर्शन कर रहे दिव्यांगों को गुरुद्वारा से जो खाना आता था वो भी मोदी सरकार ने बंद करवा दिया गया है। जो मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे दिव्यांगों से नाइंसाफी है।
विकलांग उम्मीदवारों का कहना है कि वो 2018 में रेलवे भर्ती बोर्ड के ग्रुप-डी की लिखित परीक्षा में पास हो गए थे। जो अभ्यर्थी पास हुए थे उन्हें विभाग की तरफ से कहा गया था कि उनका डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होगा। कुछ दिन के बाद रेलवे ने इस परीक्षा में सीट बढ़ा दी, लेकिन जब रिवाइज नतीजा आया तो उसमें पहले से परीक्षा पास करने वाले दिव्यांग उम्मीदवारों का नाम नहीं था। जिससे नाराज दिव्यांग अभ्यर्थी लगभग एक हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं।
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यह है मामला
रेलवे ने 2018 में ग्रुप-डी के पदों के लिए आवेदन मांगे थे, जिसमें कई पदों पर उम्मीदवारों की नियुक्ति दे दी गई। विभाग ने पहले परीक्षा को 7 वर्गों में बांटा था। परंतु बाद में 14 श्रेणियां और बढ़ा दी गईं। जिससे परीक्षा पास कर चुके उम्मीदवार भी नौकरी से वंचित रह गए।
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सचिन चौधरी ने ट्वीट किया है कि प्रदर्शन कर रहे दिव्यांगों को गुरुद्वारा से जो खाना आता था वो भी मोदी सरकार ने बंद करवा दिया गया है। जो मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे दिव्यांगों से नाइंसाफी है।
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विकलांग उम्मीदवारों का कहना है कि वो 2018 में रेलवे भर्ती बोर्ड के ग्रुप-डी की लिखित परीक्षा में पास हो गए थे। जो अभ्यर्थी पास हुए थे उन्हें विभाग की तरफ से कहा गया था कि उनका डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होगा। कुछ दिन के बाद रेलवे ने इस परीक्षा में सीट बढ़ा दी, लेकिन जब रिवाइज नतीजा आया तो उसमें पहले से परीक्षा पास करने वाले दिव्यांग उम्मीदवारों का नाम नहीं था। जिससे नाराज दिव्यांग अभ्यर्थी लगभग एक हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं।
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यह है मामला
रेलवे ने 2018 में ग्रुप-डी के पदों के लिए आवेदन मांगे थे, जिसमें कई पदों पर उम्मीदवारों की नियुक्ति दे दी गई। विभाग ने पहले परीक्षा को 7 वर्गों में बांटा था। परंतु बाद में 14 श्रेणियां और बढ़ा दी गईं। जिससे परीक्षा पास कर चुके उम्मीदवार भी नौकरी से वंचित रह गए।