फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   congress is losing its voters in uttar pradesh.

यूपी में दम तोड़ रही कांग्रेस, ये रही बड़ी वजह

Thu, 18 Sep 2014 01:48 AM IST
Updated Thu, 18 Sep 2014 01:48 AM IST
विज्ञापन
congress is losing its voters in uttar pradesh.

चुनावों के साथ-साथ नोएडा ही नहीं यूपी में भी कांग्रेस का जनाधार गिरता चला गया है। हालत ये हो गई है कि जमानत बचाना तक मुश्किल हो गया। पार्टी के गिरते जनाधार के प्रमुख कारणों में से एक अंदरूनी गुटबाजी है, जिसको दूर करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष ने पदाधिकारियों को तलब किया है।

विज्ञापन


परिसीमन के बाद बनी नोएडा विधानसभा सीट पर हुए चुनावों में कांग्रेस का जनाधार खिसकता चला गया। जहां 2009 तक कांग्रेस विपक्षी पार्टी सपा को टक्कर देती थी। वहीं पार्टी 2014 के आते-आते आसपास भी दिखाई नहीं देती।
विज्ञापन


2009 लोस चुनाव में कांग्रेस को सपा से महज दो हजार वोट कम मिले थे। लेकिन 2014 के विधानसभा में ये अंतर 20 हजार से अधिक का हो गया। दूसरी तरफ विधानसभा चुनावों की ही बात करें तो कांग्रेस को 2002 में करीब 39 हजार, 2012 में करीब 25 हजार जबकि इस बार महज 17 हजार मत प्राप्त हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन


साल दर साल क्षेत्र में सिमटती पार्टी का एक कारण अंदरूनी गुटबाजी है। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी इस बात को स्वीकार भी करते हैं। वरिष्ठ कांग्रेसी ने बताया कि पार्टी को पदाधिकारियों की गुटबाजी ले डूबी है।

कांग्रेस करेगी इस हार की समीक्षा

congress is losing its voters in uttar pradesh.

इस बार कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन की प्रमुख वजह नई कार्यकारिणी की घोषणा ठीक चुनावों के समय होना और पदाधिकारियों का प्रत्याशी के साथ चुनाव में नहीं जुड़ना रहा। हालांकि, पार्टी को नए सिरे से खड़े करने के लिए 24 सितंबर को जिला अध्यक्ष और महानगर अध्यक्षों की बैठक बुलाई गई है।

इसमें स्वयं प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री हार की समीक्षा करेंगे। साथ ही चुनावों में सहयोग नहीं करने वाले पदाधिकारियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाएंगे। नोएडा महानगर अध्यक्ष मुकेश यादव ने बताया कि प्रत्याशी का साथ न देकर पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाले पदाधिकारियों की लिस्ट तैयार कर ली गई। निर्देश के मुताबिक, सूची बैठक में सौंपी जाएगी।  

सपा: हार का ठीकरा दूसरे के सिर
उपचुनाव में सबसे ज्यादा किरकिरी सपा की हुई है। चुनाव को बड़ी तेजी से उठाया गया था और प्रदेश से लेकर स्थानीय स्तर पर कमर कस ली गई थी लेकिन जैसे ही मतदान का समय आया तो गलतियां होनी शुरू हो गईं। सपा संगठन ने तो कह दिया है कि उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन प्रत्याशी के साथ जुड़े कुछ लोगों ने चुनावी माहौल बिगाड़ दिया, इसलिए हार हुई है। हार की ठीकरा एक दूसरे के सिर पर फोड़ने का काम किया जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed