भाजपा के खिलाफ फिर एकजुट होंगी कांग्रेस-AAP?
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राजधानी में राष्ट्रपति शासन अभी चलता रहेगा या नई सरकार बनेगी? विधायक सभी कह रहे हैं कि सरकार बननी चाहिए लेकिन पार्टी स्तर पर फॉर्मूला तैयार करने या बताने की स्थिति में कोई नहीं है।
उपराज्यपाल नजीब जंग ने राजनीतिक हालात और विकल्प वाली चिट्ठी राष्ट्रपति को भेज दी है लेकिन निर्णय केन्द्र सरकार के हाथ में हैं। मसलन भाजपा को जो सूट करेगा, वही फैसला होने की उम्मीद है।
उम्मीद है कि सोमवार तक सब कुछ साफ हो जाएगा। कांग्रेस के नेता इसे 9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए जाने वाले जवाब की कवायद से जोड़कर देख रहे हैं। दिल्ली के राजनीतिक विश्लेषक और संवैधानिक विशेषज्ञ मंथन कर रहे हैं लेकिन उस सत्तारूपी समुद्र के मंथन से अभी तक कोई सेट फार्मूला सामने नहीं आया है।
सूत्र बताते हैं कि भाजपा के अलावा आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेता भी कुछ फार्मूले पर काम कर रहे हैं। तर्क है कि सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। फिर कांग्रेस में भी विधायक कई बार यह कह चुके हैं कि सांप्रदायिक ताकतों को रोकेंगे। ऐसे में आप और कांग्रेस एक ऐसे नाम को भी मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट करने पर मंथन कर रहे हैं जो सबको सूट करता हो।
दिल्ली: ये तीन विकल्प तय करेंगे दिशा!
दिल्ली विधानभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा बताते हैं कि राजनीतिक परिदृश्य में तीन ऑप्शन हैं। पहला सबसे बड़े दल को बुलाकर सरकार के लिए नंबर पूछें या मुख्यमंत्री की शपथ दिला दें। दूसरा है राष्ट्रपति शासन को जारी रखा जाए और तीसरा कि विस भंग करके चुनाव की घोषणा की जाए। अंतिम फैसला राष्ट्रपति को लेना है। जो गृहमंत्रालय से पूछेंगे।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने कहा है कि एक तरफ से संख्या कम होने का हवाला देकर संसद में भाजपा ने कांग्रेस को नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं दिया। तो दिल्ली में कम नंबर होने पर सरकार कैसे बनाएगी।
भाजपा नेताओं ने पूर्व में कहा कि अनैतिक तरीके से सरकार नहीं बनाएंगे। तो फिर अब कौन सा नैतिक फार्मूला भाजपा को मिला है? जिन विधायकों के सहयोग से सरकार बनाएंगे, उनका नाम उजागर करें।
दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा कि उपराज्यपाल नजीब जंग की ओर से सरकार बनाने का न्योता मिलने की स्थिति में वह भागने वाले नहीं हैं। सरकार बनाने के लिए पूरा विश्लेषण किया जाएगा। आवश्यक आंकड़ा होने पर ही सरकार बनाने की कवायद की जाएगी। इस दौरान दिल्ली की जनता के हित में जो अच्छा होगा, वही निर्णय लिया जाएगा।
सतीश उपाध्याय ने कहा कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। ऐसे में उसको सरकार बनाने का न्योता मिलने में कोई बुराई नहीं है। उपराज्यपाल संविधान के तहत कार्य कर रहे हैं। इस तरह मुद्दा यह नहीं है कि उपराज्यपाल को किस दल को आमंत्रित करना चाहिए।
उन्होंने ‘आप’ के नेताओं के उस बयान की कड़ी निंदा की जिसमें उन्होंने उपराज्यपाल के भाजपा को सरकार बनाने का न्योता देने के निर्णय को संविधान का बलात्कार एवं दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। उन्होंने इन शब्दों के उपयोग को लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए बहुत दुखद बताया।