कैग से भी चोरी हुए हैं गोपनीय दस्तावेज
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पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, कोयला मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय के बाद गोपनीय दस्तावेज चुराकर बेचने के रैकेट की आंच प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करने वाले कैग (नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक) तक पहुंच गई है। कैग चौथा विभाग है, जहां इस रैकेट की उपस्थिति मिली है। सूत्रों ने दावा किया है कि कैग से आर्मी के ऑडिट विभाग से कुछ दस्तावेज चोरी हुए हैं। क्राइम ब्रांच ने उत्तम नगर में रहने वाले कैग के एक अस्थाई कर्मचारी समेत कुछ कर्मचारियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। दिल्ली पुलिस का रिलायंस पर शिकंजा बढ़ता रहा है।
क्राइम ब्रांच के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि उत्तम नगर निवासी वीरेंद्र कैग के एम-ब्लॉक, चर्च रोड पर स्थित कार्यालय में अस्थाई कर्मचारी है। यहां कैग की रिपोर्ट में आर्मी का ऑडिट किया जाता है। पुलिस टीम ने सोमवार सुबह उत्तम नगर में दबिश दी और वीरेंद्र को पूछताछ के लिए चाणक्यपुरी के क्राइम ब्रांच कार्यालय में लेकर आई। इसके अलावा कैग के कुछ और लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। बताया जा रहा है कि कैग से भी कुछ कागजात चोरी हुए हैं या फिर इस कागजात चोरी करने वाले गिरोह से इन लोगों का कोई संबंध है।
दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस का रिलायंस पर शिकंजा बढ़ता जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय से गोपनीय दस्तावेज चोरी करने के मामले की जांच कर रही पुलिस ने सोमवार को रिलायंस के एक और बड़े अधिकारी को पूछताछ के लिए बुलाया था। रिलायंस के रघुरमन नाम के ये अधिकारी डीजीएम के पद पर तैनात हैं। इनका कार्यालय शास्त्री भवन से कुछ सौ मीटर की दूरी पर स्थित ली-मेरीडियन होटल में है। पुलिस ने उनके कार्यालय में छापेमारी भी की है और कुछ कागजात जब्त किए हैं। रिलायंस के कुछ और अधिकारियों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा जाएगा।
दस से अधिक कंपनियों को बेचता था लोकेश गोपनीय दस्तावेज
देश के अहम मंत्रालयों के गोपनीय दस्तावेजों की बिक्री का मार्केट कितना बड़ा है इस बात का खुलासा लोकेश की गिरफ्तारी के बाद हुआ है। दिल्ली पुलिस सूत्रों की मानें तो छानबीन के बाद पता चला है कि लोकेश 10 से अधिक एनर्जी कंसलटेंट कंपनियों को गोपनीय दस्तावेज बेचा करता था। इसके बदले उसे मोटी रकम मिलती थी। लोकेश की गिरफ्तारी को दिल्ली पुलिस जासूसी कांड में बड़ी कामयाबी मान रही है। पिछले कई सालों से लोकेश मंत्रालयों के कर्मचारियों को लालच देकर गोपनीय दस्तावेज लीक करवा रहा था।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लोकेश मंत्रालयों (पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस,उर्जा और कोयला) में तैनात कर्मचारियों को आने वाले सभी नए दस्तावेजों की फोटो कापी करने के लिए कहता था। बाद में कर्मचारी रुपये लेकर इन दस्तावेजों को लोकेश को सौंप देते थे। कागजात मिलने के बाद लोकेश अपनी कंपनी इंफ्रालाइन, शांतनु सैकिया की कंपनी, प्रयास जैन की कंसलटेंसी, केयर्न्स, एस्सार, रिलांइस समेत दस से अधिक कंपनियों को यह दस्तावेज दिखाकर बेच देता था। बदले में उसे मोटी रकम चुकाई जाती थी।
दिल्ली पुलिस सूत्रों की मानें तो लोकेश की जड़े तीनों ही मंत्रालय में खूब गहरी हैं। पिछले चार-पांच सालों से वह अहम दस्तावेज लीक करवाकर बेच रहा है। पुलिस अधिकारियों की मानें तो लोकेश के पिता कोयला मंत्रालय में कार चालक थे। इसी की वजह से उसकी मंत्रालय में पहचान हुई। किसकी मदद से उसने नकली आईकार्ड बनवाए और वह किस-किस के पास आता-जाता था फिलहाल इसकी तहकीकात की जा रही है।