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डीयू: हाई कट ऑफ ने बढ़ाई छात्रों की चिंता, पहली कट ऑफ में ना हों निराश, आगे भी रहेगी आस

Sat, 02 Oct 2021 10:35 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Sat, 02 Oct 2021 10:35 PM IST
सार

दिल्ली विश्वविद्यालय की पहली कट ऑफ सूची जारी होने के बाद छात्रों की चिंता बढ़ गई है। अधिकतर विषयों की कट ऑफ 100 फीसदी रही है। हालांकि विशेषज्ञ छात्रों को चिंता छोड़ अगली सूचियों का इंतजार करने की सलाह देते हैं।

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concern of the students increased due to the high cut off in delhi university
दिल्ली विश्वविद्यालय

विस्तार

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की पहली कट ऑफ में राजनीति शास्त्र, फिजिक्स, कंप्यूटर साइंस, साइकोलॉजी, बीकॉम ऑनर्स, ईकोनॉमिक्स ऑनर्स जैसे कोर्सेज में 100 फीसदी कट ऑफ ने छात्रों की चिंता को बढ़ा दिया है। अधिकतर कॉलेजों में कई कोर्सेज की कट ऑफ 95-99 के बीच में है। ऐसे में 12वीं में 90 से 95 फीसदी अंक लाने वाले छात्र परेशान हैं। हाई कट ऑफ से वह डीयू में दाखिले की आस छोड़ रहे हैं।
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भीड़ से बचने के लिए करते हैं पहली कट ऑफ ऊंची
विशेषज्ञों का कहना है कि पहली कट ऑफ देखकर छात्रों को निराश नहीं होना चाहिए। पहली कट ऑफ के मुकाबले दूसरी कट ऑफ वास्तविक होगी। दरअसल कॉलेज सीटों से अधिक दाखिलों से बचने के लिए पहली कट ऑफ को ज्यादा ऊंचा रखते हैं। डीयू की शुक्रवार को जारी पहली सूची में एसआरसीसी, हिंदू, रामजस, श्रीगुरु तेगबहादुर खालसा, जीसस एंड मैरी, किरोड़ीमल, हंसराज, आईपी जैसे कॉलेजों के कुछ कोर्सेज की कट ऑफ 99 फीसदी से 100 तक है। 
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पॉलिटिकल साइंस में 34 में से 29 की कट ऑफ 95 फीसद से अधिक
मध्य प्रदेश की ज्योति के बेस्ट ऑफ फोर में 92 फीसदी अंक हैं। वह डीयू से पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स करना चाहती हैं। डीयू के करीब 34 कॉलेजों में पॉलिटिकल साइंस कोर्स है, जिनमें से 29 कॉलेजों में इस कोर्स की कट ऑफ 95 फीसदी से अधिक है। अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि यदि पहली कट ऑफ में ही यह सीटें भर गईं तो उन्हें दाखिला नहीं मिल सकेगा। ऐसे ही यूपी की नेहा को बीकॉम ऑनर्स में दाखिला लेना है। उनके 12वीं में अंक 90 फीसदी हैं। जबकि बीकॉम ऑनर्स की कट ऑफ अधिकतर कॉलेजों में 96 फीसदी से अधिक ही है।
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विशेषज्ञ बोले- अभी दूसरी और तीसरी कट ऑफ बाकी
कई सालों तक डीयू दाखिले से जुड़े रहे पूर्व डिप्टी डीन डॉ. गुरप्रीत सिंह टुटेजा कहते हैं कि छात्रों को परेशान नहीं होना चाहिए। पहली कट ऑफ के दाखिले हो जाने दें। छात्रों को दूसरी व तीसरी कट ऑफ का इंतजार करना चाहिए। यदि डीयू में ही दाखिला लेना चाहते हैं तो अभी लड़कियों के पास एनसीवेब (नॉन कॉलिजिऐट वूमेन एजुकेशन बोर्ड) व स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) जैसे विकल्प हैं। यदि यहां दाखिला नहीं लेना चाहते तो छात्रों के पास अंबेडकर विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली स्किल यूनिवर्सिटी में दाखिले का विकल्प भी है। कॉलेज प्रिंसिपल पहले ही कह चुके हैं कि कॉलेज सीटों से अधिक दाखिले नहीं चाहते हैं। इसलिए पहली कट ऑफ को बढ़ाया गया है। दूसरी लिस्ट में निश्चित रुप से कुछ कमी होगी और दाखिले के अवसर बनेंगे।
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