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Delhi NCR News: ऑटो, कैब, रैपिडो और मेट्रो के भरोसे यात्री
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पास जेब में, लेकिन दफ्तर पहुंचने के लिए रोज खर्च करना पड़ रहा अतिरिक्त किराया
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली में बस चालकों की हड़ताल को एक सप्ताह पूरा होने को है। बसें कम चलने से यात्रियों को अब मंजिल तक पहुंचने के लिए ऑटो, कैब, रैपिडो और मेट्रो का सहारा लेना पड़ रहा है। अमर उजाला की बुधवार की लाइव पड़ताल में सामने आया कि बस पास होने के बावजूद यात्रियों का रोज का सफर महंगा हो गया है।
बस स्टैंड और टर्मिनल पर यात्री निर्धारित रूट की बस का इंतजार करते रहे। 10-15 मिनट तक बस नहीं आने पर कई लोगों ने मोबाइल से रैपिडो और कैब बुक की, जबकि कुछ ऑटो की तलाश में सड़क की ओर निकल गए। लंबे रूट पर जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। उन्हें पहले ऑटो या कैब से मेट्रो स्टेशन या किसी कनेक्टिंग प्वाइंट तक पहुंचना पड़ रहा है। इसके बाद मेट्रो से आगे का सफर करना पड़ रहा है।
एक सफर, कई साधन और बढ़ता खर्च
महीनेभर का बस पास बनवा चुके यात्रियों के लिए परेशानी यह है कि पास की अवधि अभी बाकी है, लेकिन बस सेवा उपलब्ध नहीं होने से उसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। ऐसे में पहले से तय यात्रा बजट के अलावा रोज अतिरिक्त किराया देना पड़ रहा है। जिस सफर में पहले बस से काम चल जाता था, अब उसी के लिए दो या तीन साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। यात्री सुनील ने बताया कि दफ्तर जाने के लिए अब ऑटो या रैपिडो लेना पड़ रहा है। यात्री राकेश के अनुसार, बस का इंतजार करने के बाद दूसरा साधन लेना मजबूरी है। वहीं, अमित ने बताया कि ऑटो से मेट्रो स्टेशन और फिर मेट्रो से आगे जाने के कारण रोज का यात्रा खर्च बढ़ गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली में बस चालकों की हड़ताल को एक सप्ताह पूरा होने को है। बसें कम चलने से यात्रियों को अब मंजिल तक पहुंचने के लिए ऑटो, कैब, रैपिडो और मेट्रो का सहारा लेना पड़ रहा है। अमर उजाला की बुधवार की लाइव पड़ताल में सामने आया कि बस पास होने के बावजूद यात्रियों का रोज का सफर महंगा हो गया है।
बस स्टैंड और टर्मिनल पर यात्री निर्धारित रूट की बस का इंतजार करते रहे। 10-15 मिनट तक बस नहीं आने पर कई लोगों ने मोबाइल से रैपिडो और कैब बुक की, जबकि कुछ ऑटो की तलाश में सड़क की ओर निकल गए। लंबे रूट पर जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। उन्हें पहले ऑटो या कैब से मेट्रो स्टेशन या किसी कनेक्टिंग प्वाइंट तक पहुंचना पड़ रहा है। इसके बाद मेट्रो से आगे का सफर करना पड़ रहा है।
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एक सफर, कई साधन और बढ़ता खर्च
महीनेभर का बस पास बनवा चुके यात्रियों के लिए परेशानी यह है कि पास की अवधि अभी बाकी है, लेकिन बस सेवा उपलब्ध नहीं होने से उसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। ऐसे में पहले से तय यात्रा बजट के अलावा रोज अतिरिक्त किराया देना पड़ रहा है। जिस सफर में पहले बस से काम चल जाता था, अब उसी के लिए दो या तीन साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। यात्री सुनील ने बताया कि दफ्तर जाने के लिए अब ऑटो या रैपिडो लेना पड़ रहा है। यात्री राकेश के अनुसार, बस का इंतजार करने के बाद दूसरा साधन लेना मजबूरी है। वहीं, अमित ने बताया कि ऑटो से मेट्रो स्टेशन और फिर मेट्रो से आगे जाने के कारण रोज का यात्रा खर्च बढ़ गया है।
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