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अफसरों की हाथ की कथपुतली बना सीएम विंडो
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sun, 04 Oct 2015 06:17 PM IST
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लोगों की समस्याओं के निदान के लिए खोला गया सीएम विंडो विभागीय अधिकारियों की हाथ की कठपुतली बन गया है। शिकायतकर्ता बार-बार रिमांडर भेजते हैं फिर भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता।
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संबंधित विभागों के अधिकारी गोलमोल और आधा-अधूरा जवाब भेजकर मामले का निपटारा कर देते हैं। खास बात यह है कि शिकायतकर्ता का पक्ष सुने बगैर मामले का निस्तारण कर दिया जाता है।
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ऐसे एक नहीं सैकड़ों की संख्या में मामले सामने आए हैं। कईयों के मामले में विभाग द्वारा शिकायतकर्ता को ही शिकायत करने का आदी बता दिया जाता है।
केस नंबर एक:
-सेक्टर-7सी निवासी अशोक मंगला ने सीएम विंडो में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पड़ोसी घर की दीवार में सुराग कर जानबूझ कर पानी छोड़ रहा है। इससे दीवार में सीलन आ रही है।
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शिकायत के बाद संबंधित थाने से पुलिसकर्मी अपने स्तर से जांच पड़ताल कर रिपोर्ट भेज दी और उसमें सीलन न होने का उल्लेख कर दिया। इसके लिए मंगला से पूछताछ तक नहीं की गई।
इस शिकायत को लेकर उन्होंने जिला उपायुक्त से लेकर डीजीपी, गृह सचिव सहित मुख्य सचिव तक गुहार लगा ली लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
सीएम विंडो पर एक बार नहीं बल्कि 4-8 बार रिमांडर लगाने के बाद भी स्थिति जस की तस है। पुलिस की ओर से जो जवाब सीएम विंडो पर दिया गया उसमें उन्हें शिकायत करने का आदी बताया गया। मंगला का कहना है कि बगैर उन्हें संतुष्ट किए मामले को निस्तारित कर दिया गया।
केस नंबर दो:
-ए ब्लॉक सेक्टर-49 निवासी चेतराम चौधरी ने दी फरीदाबाद एक्स सैनिक एवं कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी समिति में घपले का आरोप लगाते हुए सीएम विंडो में शिकायत दर्ज कराई।
चार बार रिमांडर भेजने के बाद भी उनकी शिकायत पर सही जवाब नहीं मिला। चेतराम का आरोप है कि जिस विभागीय अधिकारी के खिलाफ शिकायत दी गई है, यदि उसी से जांच कराई जाएगी तो सही तरीके से जांच कैसे होगी।
केस नंबर तीन:
-ओल्ड फरीदाबाद निवासी बुजुर्ग सामाजिक कार्यकर्ता मनोहर लाल जुनेजा से पेंशन वितरण में घपला होने की शिकायत सीएम विंडो में की थी। डीसी ने मामले की जांच एसडीएम से कराई। पहले तो एसडीएम उन्हें आज-कल करते हुए टरकाते रहे।
बाद में उनका पक्ष सुना और इसमें समाज कल्याण विभाग की लापरवाही सामने आयी। बावजूद संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। जुनेजा बार-बार रिमांडर लगाते रहे लेकिन उन्हें कोई संतुष्ट जवाब नहीं मिला। आखिर में उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सीएम विंडो को बंद करने की मांग कर डाली।
उक्त केस तो एक बानगी भर है। अब तक सैकड़ों की संख्या में ऐसी शिकायतें आ चुकी हैं जिनका रिमांइडर भेजने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ और मामले को निस्तारित कर फाइल बंद कर दी गई।
-शासन द्वारा हर महीने इसकी मॉनिटरिंग की जाती है। कई पॉलिसी मैटर होते हैं जिनका समाधान जिला स्तर पर नहीं होता। कई ऐसे भी कार्य होते हैं जो होने लायक नहीं होते। फिर भी यदि कोई ऐसा केस है जिसमें शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं है तो वह मुझसे मिलकर समस्या का समाधान करा सकता है।-गौरव अंतिल, सीटीएम एवं नोडल अफसर सीएम विंडो