100 मिनट खर्च कर डेंगू-चिकनगुनिया से खुद को रखें सुरक्षित, केजरीवाल एक सितंबर से शुरू करेंगे अभियान
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दिल्ली को डेंगू व चिकनगुनिया से मुक्त करने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक सितंबर से अभियान शुरू करने जा रहे हैं। इसके तहत दस हफ्तों तक हर रविवार दिल्लीवालों से अपने घर को जलजमाव से मुक्त व साफ-सुथरा रखने की अपील की जाएगी। केजरीवाल खुद अपने घर की साफ- सफाई की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही पड़ोसियों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करेंगे। वहीं उनके मंत्री, विधायक व अधिकारी भी अभियान से जुड़ेंगे।
100 मिनट खर्च करने से दिल्लीवासी डेंगू व चिकनगुनिया की चपेट में आने से बच सकते हैं। दिल्ली सचिवालय में बुधवार को मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डेंगू का लार्वा साफ पानी में पनपने के साथ ही इसका मच्छर 200 मीटर तक ही उड़ पाता है। वहीं, आठ दिन तक पानी जमा नहीं होना चाहिए। साथ ही डेंगू की चपेट में आने की आशंका सितंबर से नवंबर के बीच रहती है।
ऐसे में अगर हफ्ते में एक दिन हर दिल्लीवासी दस मिनट अपने घर के कूलर, गमलों, छत आदि को देखकर सुनिश्चित कर ले कि पानी जमा नहीं है तो डेंगू का मच्छर नहीं पनपेगा। पूरे अभियान में लोगों को सिर्फ 100 मिनट इस पर खर्च करना होगा। इसी को ध्यान में रखकर दिल्ली सरकार अभियान शुरू करने जा रही है। केजरीवाल ने बताया कि अभियान एक सितंबर से पंद्रह नवंबर के बीच चलेगा। इस बीच लोगों से अपील की जाएगी कि वे हर रविवार सुबह दस बजे दस मिनट का वक्त अपने घर की साफ-सफाई में दें।
रष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे डेंगू के मामले
केजरीवाल ने बताया कि भारत उन 100 देशों में शामिल हैं जहां डेंगू, चिकनगुनिया का प्रकोप अधिक रहता है। राष्ट्रीय स्तर पर 2009 से 2017 के बीच डेंगू व चिकनगुनिया के मामलों में 300 फीसदी से ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं, 2017 में सबसे ज्यादा मौतें इसी बीमारी से हुई हैं। हालांकि बीते तीन सालों में दिल्ली में 80 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। 2015 में दिल्ली में डेंगू के चपेट में आने वालों की संख्या 15867 थी। 2018 में यह घटकर 2798 रह गई है। वहीं, इस बीच मौतों की संख्या 60 से घटकर चार हो गई। 2019 में मौत का अभी तक एक भी मामला सामने नहीं आया है। जबकि डेंगू के चपेट में आने वालों की संख्या 75 है। दिल्ली सरकार की कोशिश है कि इसे न्यूनतम किया जाए।
बजट का 14 फीसदी सेहत पर खर्च
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली सरकार बीते पांच सालों में बजट का 14 फीसदी स्वास्थ्य पर खर्च कर रही है। मोहल्ला क्लीनिक बनाए गए। फीवर क्लीनिक भी मामले बढ़ने पर काम करते हैं। वहीं, सरकारी व निजी अस्पतालों में इसके लिए उचित इंतजाम किए गए हैं। डेंगू की कंट्रोल सेल भी बनाई गई है। नतीजतन मामलों की संख्या सीमित करने में मदद मिली है।