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पराली के धुएं पर केजरीवाल का रुख नरम, एजेंसियों के आंकड़ो को बताया सही, कहा स्थानीय प्रदूषण भी वजह
Fri, 18 Oct 2019 01:50 AM IST
Mohit Mudgal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Fri, 18 Oct 2019 01:50 AM IST
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
- फोटो : अमर उजाला
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वायु प्रदूषण पर काम करने वाली एजेंसियां व विशेषज्ञों के आंकड़ों को खारिज कर रहे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का रुख बृहस्पतिवार को नरम दिखा। केजरीवाल के मुताबिक सभी एजेंसियां व विशेषज्ञ इस मामले में सही हैं। लेकिन इनके आंकड़ों में दस गुना तक फर्क है। फिर भी इस बात से कोई इनकार नहीं कर रहा है कि स्थानीय के साथ पराली के धुएं से दिल्ली से वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है। जब तक पराली के धुएं का समाधान नहीं ढूंढा जाता, दिल्ली को वायु प्रदूषण से निजात नहीं मिल सकती।
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सीएम ने कहा कि वह किसी की रिपोर्ट को गलत नहीं बता रहे हैं। बात सिर्फ इतनी है कि सभी रिपोर्ट अलग-अलग समय की है। कोई एजेंसी जून 2015 को आधार बनाकर आंकड़ा जारी कर रही है तो किसी के पास 2018 का डाटा है। टेरी की 2018 की एक रिपोर्ट बताती है कि सर्दी में 36 फीसदी प्रदूषण दिल्ली का अपना है, जबकि गर्मी में यह 26 फीसदी हो जाता है।
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लेकिन पुरानी रिपोर्ट मौजूदा हालात का आकलन नहीं कर सकती। आज कोई एजेंसी यह नहीं बता सकती कि अभी दिल्ली में किन-किन वजहों से कितना प्रदूषण है। केजरीवाल के मुताबिक, दिल्ली में आज अपना व बाहर का भी प्रदूषण है। लेकिन किसका कितना है, यह बता पाना संभव नहीं है। पिछले सप्ताह ही एक एजेंसी ने बताया पराली से एक फीसदी है। जबकि दूसरी इसी आंकड़े को 10 फीसदी बता रही है। विज्ञान दस गुने का अंतर नहीं देता।
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केजरीवाल के मुताबिक, वह किसी के आंकड़े का सही या गलत नहीं बता रहे, वह सिर्फ इतना भर कह रहे हैं कि दिल्ली में प्रदूषण बाहर से भी है।केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार के सख्त कदमों की वजह से चार सालों में 25 फीसदी तक प्रदूषण कम हुआ है। हालांकि, यह बहुत संतोषजनक नहीं है।
अगले साल एक अप्रैल से स्थिति होगी स्पष्ट:
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली में अभी यह पता करने की तकनीक नहीं है कि रीयल टाइम आधार पर प्रदूषण के स्रोत क्या हैं। न इसे मापने का कोई तरीका है और न ही इसका आंकड़ा। दिल्ली सरकार इस दिशा में बेहद संजीदगी से काम कर रही है। इसके लिए वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से समझौता किया गया है।
इंडिया गेट के नजदीक एक पूरा स्टेशन तैयार किया जा रहा है। मार्च 2019 से मार्च 2020 के बीच पूरे एक साल तक इसका अध्ययन चलेगा। आने वाले एक अप्रैल दिल्ली सरकार यह बताने की हालत में होगी कि किस वजह से दिल्ली में कितना प्रदूषण है। इसकी मशीनें आ चुकी हैं। इसके बाद प्रदूषण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
दफ्तर टाइमिंग पर चल रही बात
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि सम विषम योजना के दौरान सार्वजनिक वाहनों पर एक समय दबाव न बने, इसके लिए दफ्तरों के समय बदलने पर विशेषज्ञों से बात चल रही है। एक एजेंसी इस पर काम कर रही है। जल्द ही सरकार इस पर निर्णय लेगी।