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लाल किला चमकाने के नाम पर फर्जी बिलों से जेब भर क्लर्क फरार, मामला दर्ज
Mon, 21 Jan 2019 05:34 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Mon, 21 Jan 2019 05:34 AM IST
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लाल किला
- फोटो : फाइल फोटो
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भारत के ऐतिहासिक लाल किले को चमकाने के नाम पर फर्जी बिलों के जरिये भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एसएसआई) का एक क्लर्क अपनी जेबें भरकर फरार हो गया। क्लर्क की धांधली का खुलासा तब हुआ, जब एक निजी कंपनी के नाम पर काटे गए बिलों को एएसआई के लेखा विभाग ने शक होने पर वापस कर दिया। इन बिलों की जांच में पता लगा कि जिन वस्तुओं की खरीद के नाम पर बिल बनाए गए, वे वस्तुएं खरीदी ही नहीं गईं। इस मामले में दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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आरोपी की पहचान प्रेम प्रकाश के रूप में हुई है। वह एएसआई दिल्ली जोन के लाल किला कार्यालय में एलडीसी के पद पर तैनात है, लेकिन पिछले 24 अक्तूबर से अनाधिकृत रूप से कार्यालय में गैर हाजिर है। वह 2010 से कार्यालय में एलडीसी के पद पर सेवाएं दे रहा था। उसे कार्यालय के बजट संबंधी सभी बिल और अन्य कागजात तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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एएसआई के केमिस्ट विभाग के उप अधीक्षक रघु प्रकाश ने मामले में पुलिस को सूचना दी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेम प्रकाश द्वारा निजी कंपनी के नाम पर बनाए गए बड़ी रकम के बिलों को एएसआई के लेखा विभाग ने वापस कर दिया। इन बिलों की जब जांच की गई तो पता लगा कि इन बिलों को साइंस ब्रांच के स्टाफ और अधिकारियों की बिना जानकारी के फर्जी तरीके से बनाए गए थे और बिलों पर मिले साइंस ब्रांच के अधिकारी हस्ताक्षर भी जाली मिले।
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बजट की राशि से अनाधिकृत फंड कर रहा था ट्रांसफर
एसएसआई के मुताबिक प्रेम प्रकाश वर्ष 2015-16 से बजट की राशि से अनाधिकृत फंड ट्रांसफर कर रहा था। अब तक आरोपी ने कितने फर्जी बिल बनाए और कितने की धांधली को अंजाम दिया, इसकी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि जिस पीएफएमएस अकाउंट से ये धांधलियां कर था, वह उसे ऑफिस में अंधेरा करने प्रयोग करता था, जिसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी। उसने ऑफिस के विश्वास का फायदा उठाकर लालकिला कार्यालय के बजट में हेराफेरी करने के लिए फर्जी आईडी और पासवर्ड बनाया। इस प्रकरण में कार्यालय के एक एमटीएस कर्मी बसंत लाल के भी शामिल होने का आरोप है।
कई बिलों में दिखाई गई वस्तुएं नहीं खरीदी
बताया गया कि जिन बिलों के नाम पर बजट की राशि से बड़ी घपलेबाजी की गई उनमें से कई बिलों में दिखाई गई वस्तुओं को खरीदा ही नहीं गया। इन बिलों को सच्चा साबित करने के लिए दस्तावेज की फाइलें भी अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर करके विभाग को सौंपी गई। गायब होने के बाद से एसएसआई के अधिकारी लगातार प्रेम प्रकाश से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह ना तो किसी ई-मेल का जवाब दे रहा है और ना ही किसी फोन कॉल का जवाब दे रहा है। आर्थिक अपराध शाखा ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 419, 420, 467, 468, 471, 475, 477 और 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज किया है।