शहर को डेंगू से बचाने वाले खुद बने हुए हैं लापरवाह
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जिले में मलेरिया और डेंगू के मरीजों की संख्या दिनों-दिन बढ़ रही है। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग अब फॉगिंग तेज करने का दावा कर रहे हैं। लेकिन खुद उदासीन बने हुए हैं।
नगर निगम की बात करें तो यहां के अधिकारी दूसरों को नसीहत तो दे रहे हैं लेकिन खुद अपने विभाग को उन्हें देखने की फुर्सत नहीं है।
यहां कदम-कदम पर डेंगू फैलने का खतरा बना हुआ है और अधिकारी अनजान बने हुए हैं। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार को निगम के विभिन्न विभागों का जायजा लिया।
कूलरों में भरा पानी, मंडरा रहे मच्छर
नगर निगम मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं में गर्मी से बचने के लिए कूलर लगाए गए हैं लेकिन उनकी न तो साफ-सफाई होती है और न ही कूलर के पानी बदले जाते हैं।
कूलर में आसानी से दिख जाएंगे मच्छर
यानि एक बार पानी भरने के बाद कर्मचारी उसे बदलना भूल जाते हैं। यही कारण है कि उनमें मच्छरों को आसानी से देखा जा सकता है।
यह कहानी किसी एक ब्रांच की नहीं है बल्कि कैंपस में बने तहसीलदार ब्रांच, डीए ब्रांच, प्लानिंग ब्रांच, एफसी ब्रांच, जेटीओ ब्रांच, इंजीनियरिंग ब्रांच और वर्कशॉप की एक जैसी कहानी है। यहां कूलर खुले पड़े हैं और उनमें मच्छर पैदा हो गए हैं।
वाटर कूलर की भी सफाई नहीं
कहने को तो नगर निगम ने कर्मचारियों को पीने के लिए वाटर कूलर लगवा रखा है लेकिन बदइंतजामी के चलते वह कबाड़ में तब्दील हो गया है।
यहां भी पानी भरा रहता है, लेकिन उसे साफ करने की कोशिश नहीं की जाती। ये हाल तब है जबकि एक नहीं सैकड़ों की संख्या में निगम कर्मचारी यहां विभिन्न दफ्तरों में बैठते हैं।
न आल आउट की व्यवस्था न फॉगिंग की
शहर भर में मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए फॉगिंग पर जोर देने वाला नगर निगम अपने दफ्तरों के कर्मचारियों को बचाने के लिए कोई उपाय करने को तैयार नहीं है।