भारतीय मरीज के लिए फरिश्ता बना चीनी शख्स
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ब्लड कैंसर से जूझ रहे एक 16 वर्षीय भारतीय किशोर को चीन का एक व्यक्ति फरिश्ते के रूप में मिला। उसने इस बच्चे को अपने स्टेम सेल देकर इसकी जान बचाई।
यह इस तरह का पहला मामला है जिसमें अंतरराष्ट्रीय प्रत्यारोपण कर भारतीय किशोर को चीन के नागरिक के स्टेम सेल प्रत्यारोपित किए गए।
शनिवार को चीन से स्टेम सेल के भारत आने के बाद दिल्ली में यह प्रत्यारोपण किया गया। चाइना रेडियो इंटरनेशनल (सीआरआई) के मुताबिक ऑपरेशन में मदद करने वाले चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. विमार्श रैना ने बताया कि प्रत्यारोपण के बाद किशोर की स्थति बेहतर है।
अविश्वसनीय था सैंपल का मिलान
चीन के 37 वर्षीय डोनर ने कहा कि 2012 में वह चाइना मैरो डोनर प्रोग्राम (सीएमडीपी) से जुड़ा था, लेकिन उसने कभी नहीं सोचा था कि वह एक विदेशी की जान बचा सकता है।
किसी विदेशी व्यक्ति से मेरे बोन मैरो के सैंपल का मिलान अविश्वसनीय है। यह मेरे जीवन के लिए एक उपहार स्वरूप है। एक 12 वर्षीय बच्चे का पिता होने के नाते मैं उस भारतीय बच्चे के अभिभावकों की भावनाएं अच्छी तरह समझता हूं।
रिपोर्ट के मुताबिक गैर रिश्तेदारी में स्टेम सेल के मिलान की संभावना 10 हजार में एक से भी कम होती है। डॉ. रैना के मुताबिक भारत में स्टेम सेल डाटाबेस को सही ढंग से रखा नहीं जाता है, जिसके चलते हमें विदेशी डोनर की मदद लेनी पड़ी। इसलिए हमने चीन का डाटाबेस जांचा।