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Delhi : प्रदूषण से वायरल के साथ एलर्जी के शिकार हो रहे बच्चे, मौसमी बदलाव के बीच बढ़े मामले
Mon, 06 Nov 2023 05:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 06 Nov 2023 05:59 AM IST
सार
मौजूदा समय में वायरल के लक्षण ज्यादातर घरों में दिख रहे हैं। स्ट्रेन में आए बदलाव के कारण वायरल लंबे समय तक परेशान कर रहा है। ऐसे में अचानक खतरनाक हुए प्रदूषण ने वायरल की समस्या को दोगुना कर दिया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
विस्तार
मौसमी बदलाव के बीच दिल्ली-एनसीआर में बढ़े प्रदूषण ने वायरल को और घातक बना दिया। मौजूदा समय में वायरल के लक्षण ज्यादातर घरों में दिख रहे हैं। स्ट्रेन में आए बदलाव के कारण वायरल लंबे समय तक परेशान कर रहा है। ऐसे में अचानक खतरनाक हुए प्रदूषण ने वायरल की समस्या को दोगुना कर दिया। बच्चे वायरल के साथ एलर्जी का भी शिकार हो रहे हैं। बच्चों में सांस लेने में तकलीफ होने के साथ गले में खराश, शरीर में दर्द, बुखार जैसी परेशानियां बढ़ गईं हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में वायरल काफी प्रभावी होता है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। यहीं कारण है कि अस्पताल में ऐसे बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ी है। लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि रोजाना ऐसे बच्चे अस्पताल पहुंच रहे हैं। छह साल तक के बच्चों में सांस लेने की दिक्कत सहित अन्य परेशानी देखने को मिल रही है। वहीं आठ से 11 साल तक के बच्चों में बुखार, सिर दर्द, गले में खराश जैसी परेशानी हैं। उनका कहना है कि बच्चा जितना छोटा हैं समस्या उतनी ही गंभीर हो रही है।
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छोटे बच्चे में पता नहीं चलती समस्या
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. चेतन ने कहा कि जिन बच्चों को पहले से निमोनिया, छाती में दिक्कत की समस्या है। उन्हें प्रदूषण ज्यादा परेशान कर रहा है। इन बच्चों को प्रदूषित वातावरण से दूर रखने की जरूरत है। यह बच्चे ठीक होने के बाद भी बार-बार बीमार हो सकते हैं। इनमें सामान्य वायरल भी काफी गंभीर हो जाता है।
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मानसिक और न्यूरो समस्या की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि जितनी कम उम्र से बच्चा प्रदूषक तत्वों को शरीर में पहुंचाता है। उस बच्चों में मानसिक व न्यूरो समस्या होने की आशंका उतनी ही ज्यादा बढ़ जाती है। इन बच्चों में काम करने की क्षमता भी काफी कम हो जाती है।
छोटे बच्चों को दिक्कत क्यों
बड़ों के मुकाबले छोटे बच्चों का लंग्स काफी कमजोर होता है। यह प्रदूषक तत्व को छान नहीं पाते और लंग्स के टिशु से होते हुए आसानी से खून व ऑक्सीजन में मिलकर दिल, दिमाग तक पहुंच जाते हैं। इन प्रदूषक तत्वों के कारण बच्चों में परेशानी होने की समस्या काफी ज्यादा रहती है। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़े लोगों के मुकाबले काफी कम होती है और यह इन विषैले तत्व से लड़ नहीं पाते।