दिल्ली के हीरो को मुख्यमंत्री का सलाम, कोरोना योद्धाओं की कहानियां साझा करेंगे केजरीवाल
- केजरीवाल के मुताबिक ये ऐसे योद्धा हैं जो अपनी जान की परवाह किए बगैर दिन-रात काम कर रहे हैं
- सीएम ने कहा दिल्ली अब तक की सबसे मुश्किल जंग इन योद्धाओं के सहारे मजबूती से लड़ रही है
- इनकी वजह से ही कोरोना के ठीक हो रहे मरीजों की संख्या बढ़ी है
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विस्तार
कोरोना वायरस और लॉकडाउन के दौरान फ्रंटलाइन पर काम करने वाले लोगों को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली का हीरो करार दिया है। बुधवार को केजरीवाल ने डॉक्टर्स, नर्स, प्रिंसिपल और शिक्षक, सिविल डिफेंस वॉलिंटियर्स, दिल्ली पुलिस, आशा वर्कर्स, बस ड्राइवर, कंडक्टर और मार्शल से जुड़ी कहानियां साझा कीं।
केजरीवाल के मुताबिक, यह ऐसे योद्धा हैं जो अपनी जान की परवाह किए बगैर दिन-रात काम कर रहे हैं। दिल्ली अब तक की सबसे मुश्किल जंग इन योद्धाओं के सहारे मजबूती से लड़ रही है। इनकी वजह से ही कोरोना के ठीक हो रहे मरीजों की संख्या बढ़ी है। यह वही लोग हैं, जिनके सहारे दिल्ली में 10 लाख लोगों को रोजाना भोजन कराया जा रहा है।
लाखों प्रवासी इन्हीं की वजह से अपने घर जा पा रहे हैं। आज के हीरो अपना घर-बार छोड़कर रात-दिन दिल्ली को सुरक्षित करने की जंग लड़ रहे हैं। केजरीवाल ने इन सबका शुक्रिया अदा करते हुए अपने ट्विटर हैंडल पर वीडियो साझा किया है।
हंगर रिलीफ सेंटर के कुक विजय यादव का एक वीडियो ट्वीट करते हुए केजरीवाल ने लिखा है कि महामारी के दौरान हंगर रिलीफ सेंटर के रसोइया जरूरतमंदों के लिए खाना बनाकर पुण्य का काम कर रहे हैं।
दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान हममें से ज्यादातर लोग अपने अपने घरों में बंद थे, लेकिन कुछ दिल्लीवासी जान की परवाह किए बिना, हमारे शहर और देश की सेवा में तैनात थे। इन हीरो को पूरी दिल्ली सलाम करती है।
22 घंटे कर रहे काम, ताकि भूखे न रहें हजारों लोग
विजय यादव का कहना है कि लॉकडाउन होने के बाद से वह रोजाना सिर्फ 2 घंटे सो रहे हैं। इस समय बहुत मेहनत करनी पड़ रही है। जब मिड-डे मील होता था, तब काम कम था। हमारी रसोई में रोज 36 हजार लोगों का खाना बनता है। यह करीब 70 हंगर रिलीफ सेंटर में जाता है।
रात 2 बजे से खाना बनाने का काम शुरू हो जाता है और सुबह 8 बजे तक बनता है। इसके बाद सफाई की जाती है। इसके बाद दोपहर 12 बजे से शाम का खाना बनने लगता है। परिवार के लोग परेशान हैं। वह बुला भी रहे हैं, लेकिन अगर हम परिवार को देखेंगे तो यहां 30 से 35 हजार लोग भूखे हैं, उनको कौन देखेगा?
महीनेभर से घर नहीं गई हूं...
एलएनजेपी अस्पताल की नर्स आशा का कहना है कि उन्हें अभी 14 दिनों तक लगातार ड्यूटी करनी है। हमारी तीन शिफ्ट सुबह, शाम और रात की ड्यूटी है। सुबह और शाम की ड्यूटी 6-6 घंटे की है और रात की ड्यूटी 12 घंटे की है। इस तरह 14 दिन लगातार ड्यूटी करनी है और कोई अवकाश नहीं मिलेगा। इसके बाद 14 दिन क्वारंटीन में रहना है। फिलहाल, जो भी समय मिलता है उसमें फोन या वीडियो कॉल करके परिवार के संपर्क में रहती हूं। अस्पताल में सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। अपने घर नहीं जा सकती हूं। क्योंकि, परिवार को संक्रमण लगने का खतरा है। दिल्ली सरकार हमारे परिवार की सभी जरूरतों का ख्याल रख रही है। यह सौभाग्य की बात है कि आप घर पर हैं और अपने परिवार को समय दें रहे हैं। आप हमसे पूछिए, महीने भर से हम लोग अपने घर नहीं गए हैं।
भूखे लोगों को खाना खिलाने का फैसला सही
27 वर्षीय सिविल डिफेंस वॉलिंटियर राजेंद्र कालकाजी स्थित दिल्ली सरकार के हंगर रिलीफ सेंटर में सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित कराने का काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि दिल्ली सरकार के सिविल डिफेंस वॉलिंटियर्स यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हंगर रिलीफ केंद्रों में अच्छी तरह से सभी को खाना परोसा जाए। यहां जितने लोग यहां आते हैं, उनमें सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित करता हूं। खास बात यह है कि हर व्यक्ति को सुबह-शाम अच्छे तरीके से खाना मिल रहा है। हालांकि, इस बीच हम अपने परिवार को बहुत कम समय दे पा रहे हैं। कभी-कभार जाने पर पूरा एहतियात बरतता हूं।
जितना संभव हो सकता था सीएम ने दीं उतनी सहूलियतें
राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के कॉर्डियक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अजीत जैन का कहना है कि दो महीने से हम सब अस्पताल में हैं। घर जाना नहीं हो सका है। रात के 2 से 3 बजे तक हम लोग होटल जाते हैं और अगले दिन सुबह 7-8 बजे तक अस्पताल आ जाते हैं। होटल में जाने के बाद भी हम लोग फ्री नहीं होते हैं। वहां पर जाने के बाद भी लगातार फोन आते रहते हैं। मुख्यमंत्री ने हम सभी के साथ बैठक की थी। जब लॉकडाउन था, सब कुछ बंद था और आने-जाने में समस्या हो सकती थी। उन्होंने दिल्ली में जितना संभव हो सकता था, उतना सभी को सहूलियतें दीं।
यह हैं दिल्ली के हीरो
-कम्यूनिटी किचन कूक
-सिविल डिफेंस वॉलिंटियर्स
-प्रिंसिपल और शिक्षक (राशन वितरण)
-पुलिस
-आशा वर्कर्स
-डॉक्टर्स
-नर्स
-बस ड्राइवर्स
-कंडक्टर्स
-मार्शल