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छठ महापर्व 2018: नहाय-खाय के साथ छठ शुरू, घाट हो गए तैयार, पूजन सामग्री से सजे बाजार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 11 Nov 2018 06:03 AM IST
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पूर्वी उत्तर प्रदेश व बिहार में धूमधाम से मनाए जाने वाले छठ महापर्व आज से शुरू हो गया है। इस पर्व को लेकर दिल्ली में भी तैयारियां शुरू हो गई है। एक तरफ जहां छठ पूजा के लिए यमुना घाटों को तैयार किया जा रहा है। वहीं, बाजारों में रौनक बढ़ गई है।
यह महापर्व आज से नहाय-खाय से शुरू होकर 14 नवंबर को सूर्योदय के अर्घ्य देने के साथ समाप्त होगा। छठ महापर्व रविवार को नहाए खाए के साथ शुरू हो रहा है। इस पर्व का मुख्य प्रसाद ठेकुआ जो आटे से बनता है वहीं खजूर आटे और मैदा दोनों से तैयार किया जाता है।
इसके लिए घरों में गेहूं चुनने व मिट्टी का चूल्हा तैयार करने का सिलसिला शुरू हो गया है। व्रतधारी पूजा सामग्री के लिए नए बर्तन और कपड़े खरीदने में मशगूल हैं। साड़ियों की दुकानों पर भी रौनक है। व्रती नई साड़ी पहनकर ही अस्तांचल व उदय होते सूर्य को अर्घ्य देती हैं।
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इन बाजारों में उमड़ रही भीड़
पूजन सामग्री के लिए दिल्ली के पालम इलाके, पूर्वी दिल्ली, द्वारका, बुराड़ी, गोपालपुर, जहांगीर पुरी समेत कई जगहों पर बाजार में रौनक बढ़ गई है। कोशी, पीतल का सूप, बांस का सूप, दउरा, केला, संतरा, अनार, सेब, पानी फल, गागल, पानी वाला नारियल, गन्ना, कच्ची हल्दी, मूली, अदरक, सूथनी आदि की दुकानें सजने लगी हैं।
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यह महापर्व आज से नहाय-खाय से शुरू होकर 14 नवंबर को सूर्योदय के अर्घ्य देने के साथ समाप्त होगा। छठ महापर्व रविवार को नहाए खाए के साथ शुरू हो रहा है। इस पर्व का मुख्य प्रसाद ठेकुआ जो आटे से बनता है वहीं खजूर आटे और मैदा दोनों से तैयार किया जाता है।
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इसके लिए घरों में गेहूं चुनने व मिट्टी का चूल्हा तैयार करने का सिलसिला शुरू हो गया है। व्रतधारी पूजा सामग्री के लिए नए बर्तन और कपड़े खरीदने में मशगूल हैं। साड़ियों की दुकानों पर भी रौनक है। व्रती नई साड़ी पहनकर ही अस्तांचल व उदय होते सूर्य को अर्घ्य देती हैं।
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इन बाजारों में उमड़ रही भीड़
पूजन सामग्री के लिए दिल्ली के पालम इलाके, पूर्वी दिल्ली, द्वारका, बुराड़ी, गोपालपुर, जहांगीर पुरी समेत कई जगहों पर बाजार में रौनक बढ़ गई है। कोशी, पीतल का सूप, बांस का सूप, दउरा, केला, संतरा, अनार, सेब, पानी फल, गागल, पानी वाला नारियल, गन्ना, कच्ची हल्दी, मूली, अदरक, सूथनी आदि की दुकानें सजने लगी हैं।
घाटों की साफ-सफाई शुरू
दिल्ली के यमुना के किनारे बनने वाले घाटों की साफ-सफाई शुरू हो गई है। यमुना घाट पर लकड़ी के बाड़ लगाने के साथ ही मिट्टी को ही खानेदार सीढ़ियां तैयार की जा रही है। ताकि अर्घ्य देने के लिए महिलाओं को परेशान न होना पड़े। प्रशासन की तरफ से भी सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जा रहे है। घाटों पर सीसीटीवी लगाने का काम चल रहा है।
पंडित राधेश पांडेय के अनुसार भगवान सूर्य को समर्पित इस पूजा को कठिन व्रतों में से माना जाता है। व्रती दो दिनों तक निर्जला रहते है। कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को यह व्रत रविवार से आरंभ हो रहा है। दूसरा दिन सोमवार को खरना होगा। पूरे दिन व्रत करने के बाद शाम को व्रती प्रसाद ग्रहण करेंगे। मुख्य प्रसाद ठेकुआ, टिकरी है। मंगलवार को खष्ठी को व्रती अस्तांचल सूर्य को तालाब, नदी के घाट के किनारे अर्घ्य देंगे। सप्तमी को प्रात: सूर्योदय के समय अर्घ्य देंगे व विधिवत पूजा कर प्रसाद वितरित करेंगे।
पंडित राधेश पांडेय के अनुसार भगवान सूर्य को समर्पित इस पूजा को कठिन व्रतों में से माना जाता है। व्रती दो दिनों तक निर्जला रहते है। कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को यह व्रत रविवार से आरंभ हो रहा है। दूसरा दिन सोमवार को खरना होगा। पूरे दिन व्रत करने के बाद शाम को व्रती प्रसाद ग्रहण करेंगे। मुख्य प्रसाद ठेकुआ, टिकरी है। मंगलवार को खष्ठी को व्रती अस्तांचल सूर्य को तालाब, नदी के घाट के किनारे अर्घ्य देंगे। सप्तमी को प्रात: सूर्योदय के समय अर्घ्य देंगे व विधिवत पूजा कर प्रसाद वितरित करेंगे।