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दिल्ली: यमुना में जहरीले झाग की समस्या काफी पुरानी, स्थानीय प्रशासन बेपरवाह, न कोई दिशानिर्देश न कोई जागरूकता कार्यक्रम

Mon, 08 Nov 2021 05:05 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 08 Nov 2021 05:05 PM IST
सार

यमुनोत्री से निकलकर संगम तक जाने वाली यमुना नदी का मात्र दो फीसदी हिस्सा दिल्ली से होकर गुजरता है लेकिन इसमें प्रदूषण फैलाने में देश की राजधानी का ही सबसे बड़ा हिस्सा माना जाता है।

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Chhath Puja 2021 Delhi yamuna river toxic foam polluted water no action from local authority
दिल्ली में बहती यमुना नदी में जहरीला झाग, स्नान करतीं छठ व्रती महिलाएं - फोटो : एएनआई

विस्तार

आस्था और विश्वास का पर्व छठ आज 'नहाय-खाय' के साथ ही शुरू हो गया है। इसी के साथ दिल्ली में छठ को घाट पर मनाने की राजनीति भी गर्मा गई है। कोरोना के खतरे को देखते हुए जहां दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने यमुना के घाटों पर छठ पर्व मनाने पर रोक लगाई हुई है, वहीं भारतीय जनता पार्टी घाटों पर छठ मनाने के लिए इजाजत देने की बात कह रही है। विपक्ष ने दिल्ली सरकार पर लोगों की आस्था से खिलवाड़ करने का भी आरोप लगाया है। इन सब सियासी और धार्मिक उठापटक के बीच यमुना नदी का जो हाल सामने आया है, वह सोच में डाल देता है।

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लगभग 80 प्रतिशत प्रदूषण दिल्ली से
यमुनोत्री से निकलकर संगम तक जाने वाली यमुना नदी का मात्र दो फीसदी हिस्सा दिल्ली से होकर गुजरता है लेकिन इसमें प्रदूषण फैलाने में देश की राजधानी का ही सबसे बड़ा हिस्सा माना जाता है। एक स्टडी के अनुसार यमुना लगभग 80 फीसदी प्रदूषित दिल्ली में होती है। इसे ऐसा समझा जा सकता है कि दिल्ली में अगर यमुना नदी को देखा जाए तो उसमें भारी मात्रा में सफेद झाग नजर आता है। वह कुछ और नहीं बल्कि पानी में अमोनिया की मात्रा बढ़ने की वजह से बनने वाला झाग होता है।
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यह पानी इंसान तो क्या पशु पक्षियों के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होता है। ऐसे में छठ के दौरान इस पानी में डुबकी लगाना या इसके पास भी जाना कितना खतरनाक होगा यह समझा जा सकता है। इन सबके बावजूद दिल्ली में छठ पर्व के आ जाने पर भी स्थानीय प्रशासन की ओर से किसी भी तरह का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। लोगों को इस यमुना के प्रदूषित पानी के दुष्प्रभाव के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।
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स्थानीय प्रशासन का रवैया चिंताजनक
सोमवार सुबह से छठ व्रत रखने वाली महिलाएं यमुना नदी में आकर स्नान कर रही थीं। उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और इस पर प्रतिक्रियाओं का एक दौर चल पड़ा। लेकिन इसका सच यह है कि यमुना सालों से प्रदूषित है और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम इसके लिए पर्याप्त नहीं है। 

इतना ही नहीं इस जहरीले झाग से बचने के लिए न तो कोई दिशा निर्देश जारी किए गए है और न ही लोगों को जागरूक करने की कोई मुहिम चलाई जा रही है। लोग अनजाने में इस जानलेवा प्रदूषण के संपर्क में आ रहे हैं।

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