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75 करोड़ का लोन दिलाने का झांसा देकर 4.25 करोड़ ठगे, गिरफ्तार
Wed, 07 Oct 2020 05:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 07 Oct 2020 05:55 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
खुद को चैनल फाइनेंसर बताकर सस्ती दर पर 75 करोड़ रुपये का लोन दिलाने के नाम पर एक कंपनी के निदेशक से सवा चार करोड़ रुपये की ठगी करने वाले आरोपी को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान आशीष सक्सेना के तौर पर हुई है। उसने पिता संजय सक्सेना के साथ मिलकर एक कंपनी के निदेशक प्रशांत सरीन को करोड़ों रुपये का लोन दिलाने के नाम पर सवा चार करोड़ रुपये ऐंठे थे।
पुलिस ने पहले आरोपी के पिता संजय सक्सेना को गत 16 अगस्त 2020 को और उसके बाद आशीष को 5 अक्तूबर को गिरफ्तार किया है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर दो दिनों का रिमांड लिया गया है। आर्थिक अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त डॉ. ओपी मिश्रा ने बताया कि जुलाई 2018 में प्रशांत सरीन की मुलाकात आरोपी संजय सक्सेना से हुई थी, जो खुद को बड़ा फाइनेंसर और सोने व हीरे का व्यापारी बताता था।
उसने बताया कि वह कंपनियों को बिजनेस लोन भी सस्ते दर पर दिलवाने का काम करता है। उसने प्रशांत सरीन को यह भरोसा दिया कि वह उन्हें 75 करोड़ रुपये का लोन महज 8 प्रतिशत की दर से दिलवा सकता है। संजय सक्सेना अपनी कंपनी एलडी ग्रुप से शिकायतकर्ता की कंपनी को दो बार में 35 व 40 करोड़ रुपये की रकम ट्रांसफर करने की बात कही। स्टैंप पेपर आदि के खर्च के लिए शिकायतकर्ता से रुपये ट्रांसफर करवा लिये।
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शिकायतकर्ता के मुताबिक, 75 करोड़ रुपये का लोन 7 साल के लिए 6 प्रतिशत के दर पर दिलवाना तय हुआ था। स्टैंप पेपर वगैरह के लिए रकम ट्रांसफर कराने के बाद आरोपी ने कहानी गढ़ते हुए बताया कि उसकी कंपनी पर इनकम टैक्स विभाग की रेड पड़ी और उसका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया है। इनकम टैक्स अधिकारियों से सेटलमेंट करने के नाम पर उसने शिकायतकर्ता से 4.25 करोड़ रुपये लिये गए लेकिन शिकायतकर्ता को कोई लोन नहीं दिलवाया।
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पुलिस ने पहले आरोपी के पिता संजय सक्सेना को गत 16 अगस्त 2020 को और उसके बाद आशीष को 5 अक्तूबर को गिरफ्तार किया है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर दो दिनों का रिमांड लिया गया है। आर्थिक अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त डॉ. ओपी मिश्रा ने बताया कि जुलाई 2018 में प्रशांत सरीन की मुलाकात आरोपी संजय सक्सेना से हुई थी, जो खुद को बड़ा फाइनेंसर और सोने व हीरे का व्यापारी बताता था।
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उसने बताया कि वह कंपनियों को बिजनेस लोन भी सस्ते दर पर दिलवाने का काम करता है। उसने प्रशांत सरीन को यह भरोसा दिया कि वह उन्हें 75 करोड़ रुपये का लोन महज 8 प्रतिशत की दर से दिलवा सकता है। संजय सक्सेना अपनी कंपनी एलडी ग्रुप से शिकायतकर्ता की कंपनी को दो बार में 35 व 40 करोड़ रुपये की रकम ट्रांसफर करने की बात कही। स्टैंप पेपर आदि के खर्च के लिए शिकायतकर्ता से रुपये ट्रांसफर करवा लिये।
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शिकायतकर्ता के मुताबिक, 75 करोड़ रुपये का लोन 7 साल के लिए 6 प्रतिशत के दर पर दिलवाना तय हुआ था। स्टैंप पेपर वगैरह के लिए रकम ट्रांसफर कराने के बाद आरोपी ने कहानी गढ़ते हुए बताया कि उसकी कंपनी पर इनकम टैक्स विभाग की रेड पड़ी और उसका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया है। इनकम टैक्स अधिकारियों से सेटलमेंट करने के नाम पर उसने शिकायतकर्ता से 4.25 करोड़ रुपये लिये गए लेकिन शिकायतकर्ता को कोई लोन नहीं दिलवाया।