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Delhi: यीडा के भूखंड दिलाने के नाम पर ठगा, दो गिरफ्तार; करीब आठ करोड़ रुपये ठग चुका है मुख्य आरोपी

Sun, 06 Oct 2024 11:34 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 06 Oct 2024 11:34 PM IST
सार

मुख्य आरोपी जगवीर ने जल्द पैसे कमाने की साजिश रची और लोगों को बाजार मूल्य से कम दाम पर पक्का औद्योगिक प्लॉट दिलाने के लिए लालच देना शुरू किया। उसने पीड़ितों से सभी दस्तावेज लिए और दोस्त वर्षा के नाम पर बैंक खाता खोला। खाते में उसका ईमेल आईडी और फोन नंबर दर्ज था।

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Cheated in the name of getting YIDA plot, two arrested
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपराध शाखा ने यमुना प्राधिकरण (यीडा) के भूखंड दिलाने के नाम पर ठगने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान कोसी कलां, मथुरा निवासी जगवीर सिंह और सतेंद्र नाम के रूप में हुई है। मुख्य आरोपी जगवीर लोगों से करीब आठ करोड़ रुपये ठग चुका है। आरोपियों से फर्जी आवंटन पत्र भी जब्त किए गए हैं।

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पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि सचिन वी शाह, नीलेश वी शाह और रमनदीप रहेजा की शिकायत पर अपराध शाखा में मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ताओं ने जगवीर के कहने पर यमुना एक्सप्रेसवे डेवलपर्स खाते में 3,70,20,000 रुपये स्थानांतरित किए थे। जांच में खाता वर्षा शर्मा के नाम पर और फोन नंबर, ईमेल आईडी जगवीर के नाम पर पंजीकृत मिले। शिकायतकर्ताओं ने दस्तावेज की प्रतियां आवंटन पत्रों की प्रतियां व भुगतान रिकॉर्ड की जानकारी पुलिस को दी। इन आवंटन पत्रों को प्राधिकरण से सत्यापित करवाया गया तो कागजात फर्जी पाए गए। पत्र में दिए गए भूखंडों का विवरण मूल आवंटियों के नाम पर पंजीकृत था।
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इसके बाद पुलिस ने धोखाधड़ी में शामिल बैंक खातों का विवरण एकत्र किया और लेनदेन का पता लगाया। इसके बाद दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में एसीपी/एजीएस नरेश कुमार की देखरेख में इंस्पेक्टर पवन कुमार व विकास पन्नू, एसआई अजय सिंह, अनुपमा राठी, राजा राम, कुलदीप व राजेश, एएसआई रमेश, हरिसिंह, गोबिंद और राजेश हवलदार अमित की टीम ने जांच शुरू की।

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इस बीच पता चला कि आरोपी रात में कोसी कलां में रहते हैं। इसके बाद मैगसन रिसॉर्ट, कोसी कलां में दबिश देकर जगवीर को पकड़ लिया गया। आरोपी ने पूछताछ में खुलासा किया कि कोसी कलां में ग्राहक सेवा की दुकान चलाने वाला सतेंद्र उसके निर्देश पर फर्जी दस्तावेज तैयार करता है। इसके बाद सतेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा प्राधिकरण के प्लॉट आवंटन से संबंधित जाली आवंटन पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया गया लैपटॉप भी सतेंद्र की दुकान से मिल गया।

आलीशान जीवन जीना चाहता था
कला संकाय से स्नातक जगवीर 2020 से प्रॉपर्टी डीलिंग के कारोबार से जुड़ा हुआ है। आरोपी कर्ज में डूबा था और आलीशान जीवन जी रहा था। वह दिल्ली और आसपास के इलाकों की नीलामी में प्लॉट खरीदने के इच्छुक लोगों की ग्रेनो प्राधिकरण से क्लीयरेंस सर्टिफिकेट दिलाने और अन्य कार्यों में मदद करता था। वह प्लॉट मालिकों के लिए टिन शेड और चहारदीवारी भी बनवाता था।

ऐसी शुरू की ठगी
जगवीर ने जल्द पैसे कमाने की साजिश रची और लोगों को बाजार मूल्य से कम दाम पर पक्का औद्योगिक प्लॉट दिलाने के लिए लालच देना शुरू किया। उसने पीड़ितों से सभी दस्तावेज लिए और दोस्त वर्षा के नाम पर बैंक खाता खोला। खाते में उसका ईमेल आईडी और फोन नंबर दर्ज था। वह इस खाते का संचालन कर रहा था। यहां से रकम अन्य खातों में स्थानांतरित करता था। ठगी की कमाई से उसने दो प्लॉट खरीदे थे। उसने सतेंद्र को फुसलाकर अपने निर्देशों पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए राजी किया था। आरोपियों ने ज्यादातर पैसे बैंक खाते के माध्यम से और 75 लाख रुपये नकद प्राप्त किए हैं।

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