स्वास्थ्य मंत्रालय के आदेश के खिलाफ कैट गए चतुर्वेदी
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स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स की ओर से सालाना प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) को रद्द किए जाने और दोबारा लिखने के कथित आदेश के खिलाफ भारतीय वन सेवा के विवादित अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने कैट का दरवाजा खटखटाया है।
चौधरी का दावा है कि उनकी ओर से किया गए सेल्फ अप्रेजल पर शीर्ष अधिकारियों ने मुहर लगाई थी और इसे बेहतर ग्रेड में शामिल किया था।
सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्राइब्यूनल (कैट) को दी गई अपनी शिकायत में चतुर्वेदी में मंत्रालय और एम्स की ओर से 28 मई को दिए गए आदेश को बदले की कार्रवाई करार दिया।
ये हैं संजीव चतुर्वेदी के गंभीर आरोप
बकौल चतुर्वेदी सात जुलाई 2012 से 14 अगस्त 2014 तक एम्स के मुख्य सतर्कता अधिकारी रहने के दौरान राजनीतिक रसूख वाले अधिकारियों के भ्रष्टाचार के मामले में कानून के तहत कार्रवाई के कारण स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स की ओर से उनके खिलाफ बदला लिया जा रहा है।
फिलहाल एम्स के मुख्य सतर्कता अधिकारी के पद से हटाए जाने के बाद चतुर्वेदी इसी संस्थान के उप निदेशक बने हुए हैं। पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन को चिट्ठी लिखी थी।
उन्होंने कहा था कि भ्रष्ट अधिकारियों के प्रभाव के चलते उन्हें पद से हटाया जा रहा है।