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दिल्ली विधानसभा चुनावः पाला बदलकर मैदान में तो उतर गए, अब तलाश रहे कार्यकर्ता
Fri, 24 Jan 2020 05:32 AM IST
दुष्यंत शर्मा
नवनीत शरण, नई दिल्ली
नवनीत शरण, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 24 Jan 2020 05:32 AM IST
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Kapil Mishra
- फोटो : Twitter
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कई नेता दल बदलकर तो कई गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में हैं। किसी के सामने नई पार्टी में कार्यकर्ताओं को साधने का संकट है तो किसी प्रत्याशी की ताकत इस बात में लग रही है कि नामांकन कराने के लिए तो भीड़ जुटा ली, लेकिन अब मतदाताओं को कैसे बताएं कि उनकी पार्टी और चुनाव चिह्न बदल गए हैं। ऐसी समस्याओं से जूझ रहे नेताओं ने अपने क्षेत्र में आलाकमान से बड़े नेताओं की रैली या बैठक कराने की गुहार लगाई है।
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मॉडल टाउन से भाजपा के कपिल मिश्रा चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार आम आदमी पार्टी के टिकट पर जीतकर कपिल सरकार में मंत्री भी बने थे। इस बार चुनाव में मिश्रा की पार्टी ही नहीं विधानसभा सीट भी बदल गई है। अब नई विधानसभा में कार्यकर्ता जुटाने में जूझ रहे कपिल ने भाजपा प्रबंधन से कुछ स्थानीय नेताओं के साथ बैठकें कराने की गुहार लगाई है, ताकि सामंजस्य बना रहे।
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ऐसे ही तिमारपुर विधानसभा से कांग्रेस के पूर्व विधायक सुरेंद्र पाल सिंह बिट्टू इस बार भाजपा के टिकट पर उतरे हैं। लेकिन बिट्टू का राजनीतिक इतिहास कांग्रेसी है। ऐसे में स्थानीय भाजपा नेता पूरे दिल से उनके साथ नहीं जुड़ पा रहे हैं। बिट्टू ने भी भाजपा प्रबंधन से अपने पक्ष में पार्टी नेताओं की मंडल स्तर की बैठकें कराने की मांग है।
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चांदनी चौक विधानसभा सीट का हाल एकदम उलट है। यहां पिछले चुनाव में आप के टिकट पर विधायक बनीं अलका लांबा इस बार कांग्रेस से किस्मत आजमा रहीं हैं। वहीं, पिछले चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर लांबा से हारे प्रहलाद सिंह साहनी ने इस बार आप का दामन थाम लिया है। नतीजा यह है कि दोनों नेताओं की अपनी इस विधानसभा सीट में जोर तो खूब है, लेकिन जनता भ्रमित है।
संगम विहार से भाजपा के विधायक रहे डॉ. एचसीएल गुप्ता इस बार जेडीयू के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। अब गुप्ता की परेशानी यह है कि मतदाताओं को कैसे समझाएं कि इस बार उनका चुनाव चिह्न ‘कमल का फूल’ नहीं बल्कि ‘तीर’ है। बुराड़ी विधानसभा को लेकर भी जेडीयू की यही परेशानी है।
सीमापुरी विधानसभा में लोजपा-भाजपा के गठबंधन के प्रत्याशी झोपड़ी चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ रहे हैं। अब यहां भाजपा कार्यकर्ताओं को भी अपने समर्थकों को बदले हुए चुनाव चिह्न पर बटन दबाने के लिए समझाने में जूझना पड़ रहा है। ऐसे ही आम आदमी पार्टी व कांग्रेस के भी कई प्रत्याशी हैं, जिन्हें प्रचार करने में परेशानी हो रही है।